साल 2026 की भीषण गर्मी ने भारतीय परिवारों के खर्च करने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। लोग अब स्नैक्स के बजाय ठंडी चीजों पर पैसा खर्च कर रहे हैं, जिसका सीधा असर FMCG सेक्टर की सेल्स पर पड़ा है। नतीजतन, इस साल सेक्टर के बड़े शेयरों में **14%** से **30%** तक की भारी गिरावट देखने को मिली है।
बदलती खपत, बदलती प्राथमिकताएं
जून तिमाही के डेटा से पता चलता है कि उपभोक्ताओं ने अपनी खरीदारी की प्राथमिकताएं बदल ली हैं। चॉकलेट की खपत में 10% की गिरावट आई है, जबकि दूध, फूड-बेस्ड ड्रिंक्स, मक्खन और पनीर जैसी चीजों की डिमांड में 7% से 8% की कमी देखी गई है। वहीं, गर्मी से राहत देने वाले प्रोडक्ट्स—जैसे ग्लूकोज, पैक्ड जूस और टैल्कम पाउडर—की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। नारियल पानी जैसे कैटेगरी में तो 70% तक की ग्रोथ दर्ज की गई है।
कंपनियों ने बदली रणनीति
बदलते माहौल को देखते हुए FMCG दिग्गज अपनी रणनीति बदल रहे हैं। Hindustan Unilever अब सनस्क्रीन और मॉइस्चराइजर पर जोर दे रही है, जबकि Dabur ने अपने ग्लूकोज और जूस पोर्टफोलियो को मजबूत किया है। वहीं, Emami जैसे खिलाड़ी टैल्कम पाउडर की बिक्री बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, कंपनियां छोटे और सस्ते पैक (Small packs) लॉन्च कर रही हैं ताकि बजट के दबाव में जी रहे ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके।
क्या शेयर बाजार के लिए खतरा टल गया है?
नहीं, चुनौती अभी बरकरार है। रिटेल महंगाई 20 महीने के उच्चतम स्तर के करीब है, जो उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रही है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की समस्याओं से कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हो रहा है। निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ी चिंता मानसून का पूर्वानुमान है। यदि बारिश सामान्य से कम रहती है, तो ग्रामीण आय पर असर पड़ेगा, जो FMCG वॉल्यूम ग्रोथ के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
