मीठा, पर महंगा: 'गो जीरो' पर प्रॉफिट का संकट?
सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते भारत में जीरो-शुगर (Zero-Sugar) वाले बेवरेजेज की डिमांड तेजी से बढ़ी है। शुगर-फ्री मिल्क शेक, सोडा और स्मूदी की मांग आसमान छू रही है। लेकिन, इस ट्रेंड को बनाए रखना कंपनियों के लिए महंगा साबित हो रहा है।
मुख्य वजहें ये हैं:
- स्वीटनर की बढ़ती कीमतें: कंपनियां शुगर के बजाय स्टीविया और मॉन्क फ्रूट जैसे हाई-इंटेंसिटी नेचुरल स्वीटनर्स का इस्तेमाल कर रही हैं। ये चीनी से कई गुना मीठे होते हैं, लेकिन इनकी प्रोडक्शन कॉस्ट 30% तक ज्यादा हो सकती है।
- ज़बरदस्त प्राइस वॉर: मार्केट में कड़ा मुकाबला है। Coca-Cola और PepsiCo जैसी बड़ी कंपनियां अपने जीरो-शुगर वेरिएंट्स के लिए ₹10 वाले पैक लॉन्च कर रही हैं ताकि मार्केट शेयर छीन सकें और Reliance के Campa Cola जैसे प्रतिद्वंद्वियों को टक्कर दे सकें।
- फंक्शनल ड्रिंक्स की ओर शिफ्ट: अब मार्केट सिर्फ शुगर-फ्री तक सीमित नहीं है, बल्कि विटामिन, प्रोबायोटिक्स (Probiotics) और एडैप्टोजेंस (Adaptogens) जैसे फंक्शनल फायदे (Functional Benefits) वाले ड्रिंक्स की ओर बढ़ रहा है। ऐसे प्रोडक्ट्स की R&D और मार्केटिंग में ज़्यादा खर्च आता है।
मार्केट लीडर्स की क्या है रणनीति?
- Coca-Cola India: इनके जीरो-शुगर पोर्टफोलियो की बिक्री डबल-डिजिट में है, और Diet Coke की बिक्री 2025 में साल-दर-साल डबल हो गई है। हालांकि, यह वॉल्यूम ग्रोथ मार्जिन पर असर डाल सकती है।
- PepsiCo (Varun Beverages): नो-शुगर और मिड-शुगर ड्रिंक्स इनकी सेल्स वॉल्यूम का करीब 63% हैं। कंपनी 2030 तक अपने पोर्टफोलियो को लगभग 100% नो-शुगर बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
- Dabur India: कंपनी के P/E रेशियो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 45-58 है। Dabur अपने 'Real Activ' नो-एडेड-शुगर रेंज की प्राइसिंग को मैनेज करने की कोशिश कर रही है। कंपनी प्रीमियम हेल्थ-बेस्ड प्रोडक्ट्स जैसे जीरो-शुगर ड्रिंक्स और हेल्थ गमीज़ पर फोकस कर रही है।
- ITC: जिनका मार्केट कैप करीब ₹3.85 ट्रिलियन है, वे सीधे तौर पर शुगर-फ्री बेवरेजेज सेगमेंट पर कम केंद्रित दिखते हैं, हालांकि वे FMCG सेक्टर में सक्रिय हैं।
क्या है आगे का रास्ता?
"गो जीरो" सेगमेंट का भारतीय बाजार CY24 में लगभग ₹700-750 करोड़ का है और नॉन-अल्कोहलिक सेक्टर का 10% हिस्सा रखता है। इसमें डबल-डिजिट ग्रोथ देखी जा रही है। Coca-Cola का इस सेगमेंट में 71% मार्केट शेयर है।
हालांकि, US की ओर से नेचुरल स्वीटनर्स पर संभावित टैरिफ (Tariff) कीमतों को और बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर, कंज्यूमर की हेल्थ के लिए प्रीमियम चुकाने की इच्छा आर्थिक मंदी (Economic Headwinds) के चलते कम हो सकती है। Dabur India ने 2018 से अपने 'Real' जूस लाइन में एडेड शुगर को 20% से ज़्यादा कम किया है, जो लगातार बदलती स्वास्थ्य मानकों के हिसाब से ढलने का एक उदाहरण है। इन लगातार री-फॉर्मूलेशन (Re-formulation) में काफी खर्च आता है।
