भारत का गिफ्टिंग मार्केट अब पारंपरिक तरीकों से हटकर प्रीमियम और ब्रांडेड उत्पादों की ओर शिफ्ट हो रहा है। उम्मीद है कि यह सेक्टर **2030** तक **$92.32 बिलियन** के आंकड़े को पार कर जाएगा, जो कंज्यूमर कंपनियों के लिए ग्रोथ के नए रास्ते खोल रहा है।
भारत में गिफ्टिंग का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। अब लोग ग्रीटिंग कार्ड्स या साधारण गिफ्ट्स की जगह प्रीमियम और एस्पिरेशनल ब्रांड्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बाजार 2024 में $75.16 बिलियन का था, जिसके 2030 तक $92.32 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह बदलाव केवल पसंद का नहीं, बल्कि लोगों की बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम और सोशल मीडिया के प्रभाव का भी नतीजा है।
कंज्यूमर स्टॉक्स पर असर
प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ते इस रुझान का सीधा फायदा कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी कंपनियों को मिल रहा है। Titan Company और Trent जैसी कंपनियां अपने प्रीमियम पोर्टफोलियो के दम पर मार्जिन में सुधार कर रही हैं। ग्राहक अब ब्रांडेड ज्वेलरी, वॉचेस और फैशन के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार हैं।
क्विक कॉमर्स की भूमिका
गिफ्टिंग सेक्टर में लॉजिस्टिक्स का खेल भी बदल गया है। Zomato (Blinkit) और FSN E-Commerce (Nykaa) जैसी कंपनियां अब मिनटों में प्रीमियम गिफ्ट हैंपर्स डिलीवर कर रही हैं। यह सुविधा इन्हें बाजार में बढ़त दिला रही है, हालांकि तेज डिलीवरी की ऑपरेशनल लागत और गुणवत्ता बनाए रखना इनके लिए बड़ी चुनौती है।
निवेशकों के लिए जोखिम और चेतावनी
गिफ्टिंग एक 'डिस्क्रिप्शनरी' (गैर-जरूरी) खर्च है, इसलिए आर्थिक मंदी या महंगाई का असर इस पर जल्दी पड़ता है। साथ ही, ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच चल रहे डिस्काउंट वॉर से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। आने वाली तिमाही नतीजों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियां कैसे अपने प्रीमियम प्रोडक्ट मिक्स और बढ़ते खर्चों को मैनेज करती हैं।
