राज्यों की अगुवाई में Food Safety का बड़ा अभियान
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में, पूरे देश में Food Businesses का निरीक्षण 397,009 बार किया गया। यह पिछले सालों के मुकाबले एक बड़ा उछाल है, जिसका मकसद देश भर में Consumer Protection और Public Health Standards को बेहतर बनाना है।
सैंपल फेल होने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई
तीसरी तिमाही तक 165,747 Food Samples की जांच हुई, जिनमें से 17.16% यानी एक बड़ी संख्या में सैंपल Compliance Checks में फेल हुए। इन पर तुरंत कार्रवाई की गई, जिसमें 23,580 Adjudication Cases निपटाए गए और 1,756 Criminal Convictions दर्ज की गईं ताकि Food Businesses को जवाबदेह ठहराया जा सके।
₹154 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना, 945 प्रोडक्ट्स हुए Recall
Food Businesses पर कुल ₹154.87 करोड़ का जुर्माना ठोका गया। Consumer Safety को ध्यान में रखते हुए 945 Food Products को Market से वापस (Recall) मंगाया गया, ताकि असुरक्षित चीजें लोगों तक न पहुंचें।
राज्यों की भूमिका अहम
Food Safety Enforcement में राज्य सरकारें सबसे आगे हैं। Commissioners of Food Safety राज्य स्तर पर Operations को लीड कर रहे हैं। वहीं, District Level पर Designated Officers लाइसेंसिंग और निरीक्षण का काम संभाल रहे हैं, और Food Safety Officers सैंपल कलेक्ट कर रहे हैं। Additional District Magistrates Adjudicating Officers के तौर पर सिविल मामलों में जुर्माने और सुधारात्मक आदेश जारी कर रहे हैं।
Street Vendors पर भी निगरानी, लाइसेंसिंग हुई आसान
Hygiene को बेहतर बनाने के लिए 10 लाख से ज्यादा Street Food Vendors को भी अब Formal Oversight में लाया गया है। लाइसेंसिंग नियमों को भी आसान बनाया गया है: ₹1.5 करोड़ से कम Turnover वाले Businesses को Basic Registration की जरूरत होगी, ₹1.5 करोड़ से ₹50 करोड़ के बीच Turnover वालों को State Licenses और ₹50 करोड़ से ज्यादा Turnover वालों को Central Licenses की जरूरत होगी।
Testing Network और Judicial Framework मजबूत
FSSAI ने 18 नई Laboratories को नोटिफाई कर अपने Testing Network को मजबूत किया है, जिससे जांच की Accuracy और Speed बढ़ेगी। Enforcement System को एक Judicial Structure का भी सपोर्ट है, जिसमें Magistrate Courts छोटे मामलों को और Special Courts गंभीर उल्लंघनों को देख रहे हैं। कुल मिलाकर, इस साल का प्रदर्शन एक मजबूत Regulatory System दिखाता है, जिसमें राज्यों ने Consumer Accountability और Protection में अहम भूमिका निभाई है।