प्रोटीन से कैसे चमक रहा है FMCG सेक्टर?
भारत में लोग औसतन 60 ग्राम प्रोटीन की जगह सिर्फ 37 ग्राम ही ले पा रहे हैं। इस भारी कमी को देखते हुए, FMCG कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स में प्रोटीन जोड़कर इसे एक बड़े बाजार में बदल रही हैं। हालांकि, इस मार्केट का विकास केवल प्रोटीन की कमी पूरी करने से नहीं, बल्कि प्रीमियमाइजेशन के कारण हो रहा है। कंपनियां इस हेल्थ-फोकस का इस्तेमाल करके आम प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ा रही हैं, क्योंकि ग्राहक बेहतर हेल्थ बेनिफिट्स के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार हैं। इस स्ट्रैटेजी से कंपनियों के मुनाफे और रेवेन्यू में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है।
प्रमुख खिलाड़ी और बाज़ार का ग्रोथ
डेयरी दिग्गज Amul ने FY26 में ₹1 लाख करोड़ से अधिक का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल से 11% ज्यादा है। कंपनी ने व्हे (whey) का इस्तेमाल बढ़ाया है और सीधे बिक्री के जरिए ड्रिंक्स में प्रोटीन जोड़कर बड़े पैमाने पर बाजार को टारगेट किया है। ITC Ltd. और Britannia Industries भी हेल्थ प्रोडक्ट्स की अपनी रेंज का विस्तार कर रही हैं, प्रोटीन-युक्त भोजन को ग्रोथ का एक अहम क्षेत्र मान रही हैं। Britannia Industries, जिसका वैल्यूएशन लगभग ₹1.38 लाख करोड़ है, उसका P/E रेशियो लगभग 56.75 है, जो बाजार की मजबूत उम्मीदें दिखाता है। वहीं, Parag Milk Foods का 'Avvatar' ब्रांड तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी वैल्यूएशन लगभग ₹2817 करोड़ है और P/E 17.1 से 22.27 के बीच है। इन वैल्यूएशन्स से प्रोटीन-आधारित ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर बाजार के अलग-अलग विचारों का पता चलता है। ITC का P/E 10.8-18.55 के बीच है। अनुमान है कि भारतीय हेल्दी फूड मार्केट 2034 तक 9.79% की सालाना दर से बढ़कर USD 59.8 बिलियन तक पहुँच जाएगा। कंपनियां हाई-प्रोटीन मिल्क, दही, फोर्टिफाइड आटा और स्नैक्स जैसे नए प्रोडक्ट्स भी ला रही हैं।
क्वालिटी, दाम और प्रतिस्पर्धा की चिंताएं
प्रोडक्ट्स की बढ़ती संख्या के बावजूद, क्वालिटी और दाम को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ITC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हेमंत मलिक ने प्रोटीन प्रोडक्ट्स को किफायती बनाने पर जोर दिया है। यह एक अहम मुद्दा है क्योंकि 51% भारतीय उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बहुत महंगे लगते हैं। Britannia ने क्वालिटी को लेकर चिंताओं के कारण व्हे सप्लीमेंट्स से परहेज किया है। एक अहम स्टडी में पाया गया है कि भारत में घर पर प्रोटीन का सेवन का लगभग आधा हिस्सा चावल और गेहूं जैसे अनाजों से आता है, जिनमें प्रोटीन की क्वालिटी कम होती है और वे आसानी से पचते नहीं हैं। ऐसे स्रोतों से सिर्फ प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने से सेहत को उतना फायदा नहीं हो सकता। बड़ी कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का फायदा उठा रही हैं, लेकिन नए ब्रांड्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। Amul लगातार क्वालिटी और सप्लाई चेन के लिए जरूरी निवेश को देखते हुए प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना बना रहा है। ग्राहकों की ओर से पारदर्शिता और क्लीन लेबल की मांग को पूरा करना भी महत्वपूर्ण है। इन चुनौतियों के बावजूद, Nifty FMCG इंडेक्स ने अप्रैल 2026 में लगभग 11% की बढ़त हासिल की, जो निवेशकों का भरोसा दिखाता है।
भविष्य की राह
विश्लेषकों को उम्मीद है कि हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरूकता, आय में वृद्धि और शहरीकरण के कारण हेल्दी फूड और प्रोटीन मार्केट में मजबूत ग्रोथ जारी रहेगी। प्रोटीन सप्लीमेंट मार्केट 2033 तक लगभग ₹13,186 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। फंक्शनल फूड्स, पर्सनलाइज्ड न्यूट्रिशन और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन्स जैसे ट्रेंड्स इस मार्केट को और परिपक्व बना रहे हैं, जिसके लिए लगातार इनोवेशन की जरूरत है। जो कंपनियां प्रीमियम प्राइसिंग को अफोर्डेबिलिटी के साथ सफलतापूर्वक संतुलित कर पाएंगी, हाई प्रोटीन क्वालिटी सुनिश्चित करेंगी और पारदर्शिता से ग्राहकों से बात करेंगी, वे इस डायनामिक सेक्टर में लंबे समय तक टिके रहने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में होंगी।
