भारत में दो रफ़्तार वाली डिमांड: GST के बाद MNCs की प्रीमियम सेgester, पर निचले तबके की मांग कमजोर

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AuthorMehul Desai|Published at:
भारत में दो रफ़्तार वाली डिमांड: GST के बाद MNCs की प्रीमियम सेgester, पर निचले तबके की मांग कमजोर
Overview

Multinational corporations (MNCs) ने Q4 2025 में भारत में शानदार ग्रोथ दर्ज की है, जिसकी वजह GST रेट में बदलाव और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ज़बरदस्त डिमांड रही। Apple और AO Smith जैसी कंपनियों ने रिकॉर्ड परफॉर्मेंस दी। लेकिन, शहरी इलाकों के कम आय वाले ग्राहकों की मांग अभी भी कमजोर है, जो एक 'दोहरी गति' वाली रिकवरी (dual-speed recovery) का संकेत दे रही है।

भारत की दो रफ़्तार वाली कंज्यूमर मार्केट

भारत में कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में एक 'दोहरी गति' वाली ग्रोथ देखने को मिल रही है। हालांकि, इकोनॉमी में मजबूती और डोमेस्टिक डिमांड के बढ़ते संकेतों के बीच, जमीनी हकीकत एक बंटी हुई कंज्यूमर बिहेवियर दिखा रही है। भारत की इकोनॉमी फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 में 7.5% से 7.8% तक की ग्रोथ के अनुमान के साथ मजबूत बनी हुई है, जो डोमेस्टिक डिमांड की मजबूती से प्रेरित है [4]। Q3 2025 में कंज्यूमर खर्च में बढ़त देखी गई और आगे भी इसके बढ़ने की उम्मीद है, जो एक पॉजिटिव मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल का संकेत देता है [6, 24]। एशिया-पैसिफिक में बढ़ता मिडिल क्लास वैल्यू पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जो कीमत, क्वालिटी और पर्पस को बैलेंस कर रहा है [21]। मगर, इस रिकवरी के पीछे एक बड़ा अंतर छिपा है। प्रीमियम सेगमेंट और हाई-इनकम कंज्यूमर्स के बीच डिमांड काफी मजबूत है, जिससे कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों की सेल्स रिकॉर्ड लेवल पर पहुंची हैं। वहीं, शहरी इलाकों के लो-इनकम कंज्यूमर्स के बीच डिमांड अभी भी नरम बनी हुई है, एक ऐसा ट्रेंड जिसे इंडस्ट्री लीडर्स ने भी नोट किया है [1, NEWS1]।

GST: बूस्टर और कॉम्प्लेक्सिटी

सितंबर 2025 में लागू हुए GST रेट्स के रैशनलाइजेशन (rationalization) को कई प्रोडक्ट्स की कीमतें कम होने के कारण कंजम्पशन को बढ़ावा देने का श्रेय दिया जा रहा है [4, 12, 30, 37]। इस पॉलिसी मूव ने अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के लिए रिपोर्ट की गई सेल्स को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है [1]। इसका कुल असर इन्फ्लेशन को कम कर सकता है, संभवतः शॉर्ट टर्म में 25-35 बेसिस पॉइंट्स तक [37]। लेकिन, इस रिफॉर्म में कॉम्प्लेक्सिटीज़ भी हैं। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (inverted duty structures) जैसी स्ट्रक्चरल दिक्कतों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जहां फिनिश्ड प्रोडक्ट्स की तुलना में इनपुट सर्विसेज पर GST रेट ज्यादा है। यह बिजनेस के वर्किंग कैपिटल को प्रभावित कर सकता है [12]। इन बदलावों के पूरे असर को आने वाली तिमाहियों में देखना होगा।

MNCs ने पकड़ी प्रीमियम ग्रोथ

कई मल्टीनेशनल कंपनियों ने भारतीय मार्केट का फायदा उठाया है, खासकर अपने प्रीमियम प्रोडक्ट्स के ज़रिए। Apple Inc. ने Q4 2025 में भारत में रिकॉर्ड रेवेन्यू के साथ एक "शानदार तिमाही" (terrific quarter) रिपोर्ट की है। कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स जैसे iPhone, Mac और iPad, साथ ही सर्विसेज में मजबूत डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की है [7, 16, 32]। 2025 में भारत में कंपनी की स्मार्टफोन मार्केट शेयर वॉल्यूम के हिसाब से 9% और वैल्यू के हिसाब से 28% तक पहुंच गई [7]। Apple का ग्लोबल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $3 ट्रिलियन है और P/E रेश्यो करीब 28x है [34]।

AO Smith Corporation भी भारत में 2026 के लिए डबल-डिजिट सेल्स ग्रोथ का अनुमान लगा रही है, जो डोमेस्टिक डिमांड और स्ट्रेटेजिक प्रोडक्ट लॉन्च से प्रेरित है [8, 18]। कंपनी, जिसका ग्लोबल मार्केट कैप लगभग $7 बिलियन और P/E रेश्यो 20s के ऊपरी सिरे पर है, भारत में अपने लेगेसी बिजनेस और Pureit ब्रांड से महत्वपूर्ण योगदान देख रही है [27, 36]।

Colgate-Palmolive Company ने भारत में सीक्वेंशियल ऑर्गेनिक सेल्स ग्रोथ रिपोर्ट की है। यह प्रीमियमाइजेशन स्ट्रेटेजीज और साइंस-बेस्ड इनोवेशन पर फोकस के कारण हुआ है, हालांकि कंपनी ने शहरी डिमांड में नरमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी स्वीकार किया है [31, 35]। ग्लोबली, Colgate-Palmolive (CL) का मार्केट कैप लगभग $75 बिलियन और P/E रेश्यो 24x से 35x के बीच है [2, 3]। इसकी भारतीय सब्सिडियरी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹57,559 करोड़ है [5]।

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