डेयरी इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव: Lactose-Free Milk की मांग बढ़ी, कंपनियां कर रहीं फोकस!

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AuthorNeha Patil|Published at:
डेयरी इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव: Lactose-Free Milk की मांग बढ़ी, कंपनियां कर रहीं फोकस!

भारतीय डेयरी कंपनियां अब लैक्टोज-फ्री (Lactose-Free) प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। देश की एक बड़ी आबादी, करीब **60% से 74%** लोगों को लैक्टोज पचाने में दिक्कत होती है। इसी को देखते हुए कंपनियां ऐसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रही हैं, जिनसे प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) बढ़ेगा और लोगों की हेल्थ की बदलती जरूरतों को भी पूरा किया जा सकेगा।

क्यों हो रहा है ये बदलाव?

भारतीय डेयरी इंडस्ट्री में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव देखने को मिल रहा है। बड़े प्लेयर्स और खास ब्रांड्स अपनी लैक्टोज-फ्री (Lactose-Free) प्रोडक्ट रेंज को तेजी से बढ़ा रहे हैं। अब उनका फोकस ट्रेडिशनल, बल्क कमोडिटी मिल्क (Bulk Commodity Milk) से हटकर हाई-मार्जिन (High-Margin), वैल्यू-एडेड (Value-Added) डेयरी प्रोडक्ट्स पर है। इससे कंपनियों को रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) बनाए रखने और हेल्थ-कॉन्शियस (Health-Conscious) शहरी ग्राहकों को लुभाने में मदद मिलेगी।

लैक्टोज इनटॉलरेंस (Lactose Intolerance) का बड़ा मार्केट

ये ट्रेंड इसलिए भी तेज़ी से बढ़ रहा है क्योंकि एक बड़ी आबादी, करीब 60% से 74% भारतीय लोग लैक्टोज पचाने में दिक्कत महसूस करते हैं। जो उत्पाद कभी एक खास (Niche) कैटेगरी माने जाते थे, वो अब मेनस्ट्रीम कंज्यूमर आइटम बनते जा रहे हैं। लोगों में डाइजेशन हेल्थ (Digestion Health) और फंक्शनल न्यूट्रिशन (Functional Nutrition) को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर कदम

कंपनियों के लिए लैक्टोज-फ्री मिल्क की ओर बढ़ना, प्रीमियमाइजेशन (Premiumization) की ओर एक बड़ा कदम है। स्टैंडर्ड मिल्क प्रोडक्ट्स में अक्सर प्राइस कॉम्पिटिशन (Price Competition) और लो मार्जिन (Low Margin) की दिक्कतें होती हैं। इसके उलट, लैक्टोज-फ्री मिल्क, फोर्टिफाइड डेयरी (Fortified Dairy) और हाई-प्रोटीन (High-Protein) अल्टरनेटिव्स कंपनियों को बेहतर दाम दिलवाते हैं। इससे उन्हें कमोडिटी मार्केट (Commodities Market) की वोलेटिलिटी (Volatility) से भी बचाव मिलता है।

टेक्नोलॉजी का अहम रोल

इस विस्तार का आधार टेक्नोलॉजी है। नेचुरल मिल्क में एंजाइम (Enzyme) डालकर लैक्टोज को ग्लूकोज (Glucose) और गैलेक्टोज (Galactose) में तोड़ा जाता है, जिससे दूध पचाने में आसान हो जाता है। इस प्रोडक्ट को बड़े मार्केट तक पहुंचाने के लिए कंपनियां अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (Ultra-High Temperature - UHT) प्रोसेसिंग और एसेप्टिक पैकेजिंग (Aseptic Packaging) जैसी तकनीकें अपना रही हैं। इससे दूध बिना रेफ्रिजरेशन (Refrigeration) के लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है, जो भारतीय डेयरी सप्लाई चेन (Dairy Supply Chain) की एक बड़ी लॉजिस्टिकल चुनौती को हल करता है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि, इस सेगमेंट में ऑपरेशनल (Operational) और फाइनेंशियल (Financial) चुनौतियां भी हैं। एंजाइमैटिक हाइड्रोलिसिस (Enzymatic Hydrolysis) के लिए खास इक्विपमेंट (Equipment) काफी महंगे हो सकते हैं, जो छोटी कंपनियों के लिए एक बड़ा बैरियर (Barrier) है। इसके अलावा, लैक्टोज-हाइड्रोलाइज्ड मिल्क (Lactose-Hydrolysed Milk) में क्वालिटी की समस्याएं भी आ सकती हैं। ये प्रोडक्ट्स माइक्रोबियल स्पॉइलेज (Microbial Spoilage) और माईयार्ड रिएक्शन (Maillard Reaction) के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, जो प्रोडक्ट की शेल्फ-लाइफ (Shelf-life) और टेस्ट को प्रभावित कर सकते हैं।

सप्लाई चेन और क्वालिटी का रिस्क

प्रोडक्शन के अलावा, इंडस्ट्री को व्यापक स्ट्रक्चरल रिस्क (Structural Risks) का भी सामना करना पड़ रहा है। क्लाइमेट चेंज (Climate Change) से जानवरों पर हीट स्ट्रेस (Heat Stress) बढ़ सकता है और दूध का प्रोडक्शन घट सकता है। साथ ही, कलेक्शन नेटवर्क (Collection Network) में क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (Quality Standards) बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि एंटीबायोटिक रेसिड्यूज (Antibiotic Residues) जैसी समस्याओं से बचा जा सके और ग्राहकों का भरोसा बना रहे।

भविष्य की राह

जैसे-जैसे यह कैटेगरी मैच्योर (Mature) होगी, इन्वेस्टर्स (Investors) और इंडस्ट्री वॉचर्स (Industry Watchers) इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनियां इन प्रीमियम प्रक्रियाओं की लागत और भारतीय ग्राहकों की प्राइस सेंसिटिविटी (Price Sensitivity) के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं। अमूल (Amul) जैसे बड़े कोऑपरेटिव्स (Cooperatives) और प्राइवेट प्लेयर्स (Private Players) का डिस्ट्रीब्यूशन (Distribution) बढ़ाना और क्वालिटी बनाए रखना, इस सेगमेंट की लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी (Long-term Profitability) के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.