कच्चे तेल के दाम बढ़ने से कंडोम की कीमत पर असर
Middle East में बढ़ते तनाव के चलते ग्लोबल क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई हैं। इसका असर अब भारत में आम जरूरत की चीजों पर भी दिखने लगा है। Mankind Pharma, जो भारत में कंडोम बनाने वाली एक बड़ी कंपनी है, ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो उन्हें अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
कंपनी के पास फिलहाल पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम-आधारित रॉ मैटेरियल्स जैसे केमिकल्स, लुब्रिकेंट्स और सिलिकॉन ऑयल की लागत तेजी से बढ़ रही है। साथ ही, पैकेजिंग का खर्चा भी बढ़ गया है।
ग्लोबल कंडोम कंपनियां भी झेल रही हैं दबाव
यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। Durex जैसे ब्रांड्स को सप्लाई करने वाली मलेशिया की बड़ी कंडोम निर्माता Karex Berhad ने पहले ही अपनी कीमतों में 20% से 30% की बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी सिंथेटिक रबर, नाइट्राइल और सिलिकॉन ऑयल जैसे मैटेरियल्स के बढ़ते दामों के कारण हुई है, जो Middle East में चल रहे संघर्षों से प्रभावित हैं।
हालांकि Mankind Pharma के वित्तीय नतीजों की कोई विशेष जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी की यह चेतावनी बताती है कि इस सेक्टर की कंपनियां मौजूदा मार्केट कंडीशंस में कीमतें स्थिर रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
बढ़ती कीमतों से पब्लिक हेल्थ को खतरा
भारत में कंडोम की कीमतों में संभावित वृद्धि पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम्स के लिए एक गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों को चिंता है कि बढ़ी हुई कीमतें कम आय वाले लोगों के कंडोम के इस्तेमाल को हतोत्साहित कर सकती हैं, जिससे अनचाहे गर्भधारण और यौन संचारित संक्रमणों (STIs) में वृद्धि हो सकती है। कंडोम उद्योग का तेल-आधारित उत्पादों पर निर्भर होना इसे सप्लाई में अचानक आई रुकावटों के प्रति संवेदनशील बनाता है, जो लगातार उपलब्धता और सामर्थ्य को खतरे में डालता है। मौजूदा आर्थिक दबाव इस बात का संकेत देते हैं कि इन अस्थिर कमोडिटी इनपुट्स पर भारी निर्भर कंपनियों के लिए सावधानी भरा रुख अपनाया जाना चाहिए।
