Middle East में जारी तनाव के बीच भारत में LPG यानी कुकिंग गैस की सप्लाई को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। इस अनिश्चितता का सीधा असर इलेक्ट्रिक कुकिंग अप्लायंसेज की मांग पर दिख रहा है। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में इंडक्शन चूल्हों (induction cooktops) की मांग में 90-100% तक की बढ़ोतरी देखी गई है, वहीं इलेक्ट्रिक केतली (electric kettles) की मांग भी 40-60% बढ़ी है। इस अचानक आई मांग ने शुरुआत में कुछ जगहों पर सप्लाई की कमी भी पैदा कर दी।
इस स्थिति को देखते हुए, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने इंडस्ट्री लीडर्स के साथ बैठक की है ताकि प्रोडक्शन बढ़ाया जा सके और सप्लाई सुनिश्चित हो सके। सरकार इन अप्लायंसेज को और किफायती बनाने के तरीके तलाश रही है, जैसे कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कटौती करना और कंपोनेंट इंपोर्ट को आसान बनाना।
इस मांग को पूरा करने में Havells India (मार्केट कैप: ~₹775 अरब; P/E TTM: ~51.0), Crompton Greaves Consumer Electricals (मार्केट कैप: ~₹149 अरब; P/E TTM: ~32.4) और Bajaj Electricals (मार्केट कैप: ~₹40.4 अरब; P/E TTM: ~113.1) जैसी बड़ी कंपनियां आगे हैं। Havells और Crompton ने फाइनेंशियल ईयर 25 में क्रमश: 17.15% और 7.53% की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। वहीं, Bajaj Electricals का प्रदर्शन थोड़ा मिला-जुला रहा है और इसका P/E रेश्यो काफी ऊंचा है, जो शायद पिछले एक साल में 35% से अधिक की गिरावट के बाद निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
आंकड़ों की मानें तो, भारतीय होम अप्लायंसेज मार्केट के 2030-2033 तक 5.65% से 8.3% की CAGR से बढ़ने की उम्मीद है, जिसमें छोटे अप्लायंसेज का बड़ा योगदान होगा। हालांकि, यह मौजूदा उछाल मुख्य रूप से बाहरी घटनाओं से प्रेरित है, न कि पूरी तरह से ऑर्गेनिक मार्केट विस्तार से।
लेकिन, इंडस्ट्री को कई बड़ी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह सेक्टर मुख्य रूप से चाइना से इंपोर्ट होने वाले कंपोनेंट्स पर बहुत ज्यादा निर्भर है। सरकार भले ही इंपोर्ट को आसान बनाने पर विचार करे, लेकिन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया एक बड़ी बाधा है। मार्च 2026 से लागू होने वाले सख्त नियमों के तहत कई इलेक्ट्रिकल अप्लायंसेज के लिए BIS सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा, और फिलहाल बहुत कम चाइनीज सप्लायर्स के पास यह सर्टिफिकेशन है। सुरक्षा के उद्देश्य से लाए गए ये नियम ग्रोथ को धीमा कर सकते हैं और डिलीवरी टाइम बढ़ा सकते हैं।
इसके अलावा, इलेक्ट्रिक कुकिंग अप्लायंसेज पर लगने वाला 18% GST भी एक चिंता का विषय है, जिसके लिए सरकार से कटौती की मांग की जा रही है। अगर इंपोर्ट पर प्रतिबंध बढ़ते हैं या सप्लाई चेन की दिक्कतों से कंपोनेंट की लागत बढ़ती है, तो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
इंडस्ट्री के खिलाड़ी नीतिगत समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें GST में संभावित कटौती भी शामिल है, ताकि अफोर्डेबिलिटी और प्रोडक्शन को बढ़ाया जा सके। सरकार का लोकल मैन्युफैक्चरिंग और कंपोनेंट प्रोडक्शन को बढ़ावा देने पर जोर, संभवतः प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के जरिए, एक लॉन्ग-टर्म लक्ष्य को दर्शाता है। Havells के लिए एनालिस्ट्स के अनुमान सकारात्मक बने हुए हैं, जिनके टारगेट प्राइस लगभग ₹1670 हैं। हालांकि, इस सेक्टर की पूरी सफलता कंपोनेंट सोर्सिंग की समस्याओं को हल करने और नए रेगुलेशन्स के अनुकूल ढलने पर निर्भर करेगी। इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर यह बदलाव जारी रहने की उम्मीद है, जो भारतीय घरों में ऊर्जा के अधिक विविध उपयोग में योगदान देगा।