Indian Travelers Co-Branded Cards: रोज़मर्रा की बचत का नया ज़रिया, सिर्फ ट्रिप के लिए नहीं!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Travelers Co-Branded Cards: रोज़मर्रा की बचत का नया ज़रिया, सिर्फ ट्रिप के लिए नहीं!
Overview

भारतीय उपभोक्ता अब सिर्फ यात्रा के फायदों के लिए ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के वित्तीय लाभ के लिए भी होटल लॉयल्टी प्रोग्राम और को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। मैरियट बॉनवॉय (Marriott Bonvoy) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, **62%** यात्री रिवॉर्ड जमा करने के लिए रोज़मर्रा की खर्चों पर को-ब्रांडेड पेमेंट मेथड का उपयोग करते हैं। यह लॉयल्टी प्रोग्राम के इस्तेमाल में एक बड़ा बदलाव दिखाता है और उपभोक्ता अपनी नियमित खर्चों से भी मूल्य प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।

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रोज़मर्रा के रिवॉर्ड्स से लॉयल्टी बढ़ा रहे हैं भारतीय

भारतीय उपभोक्ता ट्रैवल लॉयल्टी प्रोग्राम का इस्तेमाल करने का तरीका बदल रहे हैं। अब वे सिर्फ सपनों की छुट्टियों के बजाय, रोज़मर्रा के खर्चों से रिवॉर्ड अर्जित करने पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। एक बड़ी संख्या में, 62% यात्री, रोज़मर्रा की खरीददारी जैसे कि डाइनिंग और शॉपिंग पर लॉयल्टी पॉइंट्स इकट्ठा करने के लिए विशेष रूप से को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड और पेमेंट मेथड का उपयोग करते हैं। यह तरीका लॉयल्टी प्रोग्राम को तत्काल वित्तीय लाभ के साधन में बदल देता है, जो ग्राहकों की लगातार और ठोस रिवॉर्ड पाने की इच्छा को दर्शाता है।

बढ़ते लॉयल्टी इकोसिस्टम

उपभोक्ता व्यवहार में इस बदलाव से भारत में ट्रैवल-से जुड़े क्रेडिट कार्ड और लॉयल्टी प्रोग्राम का विकास तेज़ी से हो रहा है। बैंक और होटल कंपनियां विभिन्न खर्चों, जैसे फ़ूड डिलीवरी से लेकर रिटेल तक, पर रिवॉर्ड अर्जित करने के अवसर प्रदान करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा पार्टनरशिप कर रहे हैं। सर्वे में शामिल लगभग आधे यात्रियों का कहना है कि वे पॉइंट्स कमाने और इस्तेमाल करने के और भी तरीके चाहते हैं, और वे अपने रोज़मर्रा के खर्चों से जुड़े रिवॉर्ड्स को प्राथमिकता देते हैं। मैरियट बॉनवॉय (Marriott Bonvoy) की रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत में 77% यात्री होटल लॉयल्टी प्रोग्राम में भाग लेते हैं, जो एशिया पैसिफिक क्षेत्र के औसत से काफी ज़्यादा है।

रोज़मर्रा की ज़रूरतों और सपनों का संतुलन

रोज़मर्रा के खर्चों पर रिवॉर्ड अर्जित करना प्राथमिकता है, लेकिन यात्री इन पॉइंट्स का उपयोग कैसे करते हैं, यह तत्काल और महत्वाकांक्षी दोनों लक्ष्यों का मिश्रण दिखाता है। लगभग 77% यात्री अपने लॉयल्टी पॉइंट्स का उपयोग छोटे, ज़्यादा सुलभ रिवॉर्ड्स के लिए करते हैं, जबकि 61% बड़े फायदों के लिए इन्हें रिडीम करते हैं। भारत में प्रीमियम और अनुभव-आधारित रिवॉर्ड्स में भी रुचि बढ़ रही है। यह दर्शाता है कि लॉयल्टी प्रोग्राम दोहरे उद्देश्य को पूरा करते हैं: उपभोक्ताओं को रोज़मर्रा के खर्चों पर बचत करने में मदद करना और लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने वाले अनुभव प्राप्त करने में सक्षम बनाना। बढ़ते डिजिटल खर्चों के कारण, भारत में नए कार्ड जारी होने वाले कार्ड्स में को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड्स का हिस्सा बढ़ रहा है।

क्षेत्रीय रुझान और बाज़ार प्रतिस्पर्धा

एशिया पैसिफिक, चीन को छोड़कर (APEC) क्षेत्र में, होटल लॉयल्टी प्रोग्राम सबसे ज़्यादा लोकप्रिय हैं, जिनमें 66% यात्री शामिल होते हैं। इस क्षेत्र में ट्रैवल लॉयल्टी को बढ़ाने में फ़ूड और डाइनिंग अनुभव एक प्रमुख कारक है, जिसमें 63% APEC यात्री पाक-कला संबंधी गतिविधियों को प्राथमिकता देते हैं। भारत में, को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड का विस्तार एक बड़ा चलन है, और अनुमान है कि ये जल्द ही वॉल्यूम के हिसाब से बाज़ार का 25% से अधिक हिस्सा होंगे। Axis Bank, HDFC Bank, और SBI जैसे प्रमुख बैंक इस बढ़ते बाज़ार में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एयरलाइंस के साथ साझेदारी कर रहे हैं। इस प्रतिस्पर्धी माहौल में ग्राहकों को जोड़े रखने के लिए लॉयल्टी पेशकशों में निरंतर नवाचार की आवश्यकता है।

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