निवेशकों ने आज यानी मंगलवार को बाज़ार में ज़्यादातर FMCG और फाइनेंसियल जैसे डिफेंसिव (सुरक्षित) सेक्टरों की ओर रुख किया। इस वजह से शेयर बाज़ार में करीब 1% का उछाल आया।
FMCG शेयरों में Nestlé India सबसे आगे रहा। कंपनी ने Q4 FY26 के लिए ₹1,111 करोड़ का शानदार नेट प्रॉफिट (Net Profit) पेश किया, जो पिछले साल के मुकाबले 27% ज़्यादा है। रेवेन्यू में भी 23% की ग्रोथ दर्ज की गई। नतीजों के बाद Nestlé India का शेयर अपने 52-हफ्ते के हाई (52-week high) पर पहुँच गया।
हालांकि, FMCG सेक्टर की बात करें तो यह फिलहाल अपने छह साल के सबसे निचले वैल्यूएशन (Valuation) पर ट्रेड कर रहा है। इसका ट्रेलिंग P/E (Trailing P/E) 38.8x है। फिर भी, यह Sensex के मुकाबले 80% महंगा है। Nestlé India (P/E 77.3x) और Tata Consumer Products (P/E 77.9x) जैसे बड़े नामों के लिए यह प्रीमियम वैल्यूएशन बताता है कि बाज़ार पहले से ही इन कंपनियों से ज़बरदस्त ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है।
फाइनेंसियल सेक्टर ने भी बाज़ार को मज़बूत सहारा दिया। ICICI Bank का Q4 FY26 नेट प्रॉफिट 8.5% बढ़कर ₹13,702 करोड़ रहा। बैंक का लोन ग्रोथ (Loan Growth) 15.8% रहा, जो इंडस्ट्री में सबसे अच्छा है। एनालिस्ट्स (Analysts) ICICI Bank पर 'Buy' रेटिंग बनाए हुए हैं, और मानते हैं कि इसके वैल्यूएशन में और सुधार (rerating) की उम्मीद है।
HDFC Bank ने भी 9.1% का प्रॉफिट ग्रोथ दिखाया। हालांकि, इसका लोन ग्रोथ थोड़ा धीमा, 12.1% रहा, लेकिन डिपॉजिट (Deposit) में अच्छी बढ़ोतरी हुई। एनालिस्ट्स ने इस पर भी 'Buy' रेटिंग दी है, और लोन ग्रोथ में तेज़ी को भविष्य के लिए बड़ा ट्रिगर (Trigger) माना है।
डिफेंसिव के अलावा, Bharat Electronics Ltd (BEL) ने भी मज़बूत प्रदर्शन किया। कंपनी का FY26 टर्नओवर (Turnover) 18% बढ़ा है और इसके पास ₹2.4 लाख करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक (Order Book) है। BEL का शेयर पिछले एक साल में 55% से ज़्यादा भागा है, पर वैल्यूएशन को देखते हुए Nomura ने इसे 'Neutral' रेटिंग दी है।
बाज़ार का डिफेंसिव सेक्टर की ओर यह झुकाव समझदारी भरा लग सकता है, लेकिन इसके टिकाऊपन पर सवाल उठ रहे हैं। FMCG लीडर्स के लिए यह हाई मल्टीपल (High Multiple) किसी भी गलती की गुंजाइश कम छोड़ते हैं। वहीं, बैंकों के लिए मार्जिन और लोन ग्रोथ जैसे फैक्टर अहम रहेंगे। कुल मिलाकर, यह तेज़ी बाज़ार की छिपी हुई सतर्कता को दर्शा सकती है। अगर आर्थिक आउटलुक (Economic Outlook) सुधरता है, तो ग्रोथ सेक्टरों में फिर से खरीदारी देखी जा सकती है।
