भारत की दिग्गज लिकर कंपनियां अब प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने के लिए प्रीमियम स्पिरिट्स जैसे जिन, टकीला और सिंगल माल्ट पर फोकस कर रही हैं। हालांकि, ग्राहकों की प्राइस सेंसिटिविटी और राज्यों के जटिल रेगुलेटरी नियम इनके लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
भारत का शराब उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कंपनियां अब पारंपरिक वॉल्यूम-आधारित बिजनेस मॉडल से हटकर प्रीमियम और क्राफ्ट स्पिरिट्स की ओर रुख कर रही हैं। हालांकि, भारतीय बाजार में मास-मार्केट IMFL का दबदबा आज भी कायम है, लेकिन मार्जिन को बढ़ाने के लिए कंपनियां अब प्रीमियम सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।
प्रीमियम सेगमेंट में क्यों है कंपनियों की दिलचस्पी?
प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर मिलने वाला मार्जिन मास-मार्केट स्पिरिट्स के मुकाबले काफी बेहतर होता है। Tilaknagar Industries अब अपने पारंपरिक ब्रांडी पोर्टफोलियो से आगे बढ़कर 'House of TI' डिवीजन के जरिए प्रीमियम सेगमेंट में उतर चुकी है। वहीं, United Spirits Ltd (Diageo की सब्सिडियरी) भी 'Godawan' सिंगल माल्ट जैसे ब्रांड्स के जरिए आधुनिक भारतीय ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रही है।
दिलचस्प बात यह है कि कंपनियां ग्राहकों की प्राइस सेंसिटिविटी का भी पूरा ख्याल रख रही हैं। महंगे लिक्विड को ट्राई करने के लिए कई ब्रांड्स अब 50ml की छोटी बोतलें पेश कर रहे हैं, ताकि एंट्री बैरियर को कम किया जा सके और ज्यादा ग्राहक जुड़ सकें।
चुनौतियां और रेगुलेटरी पेंच
प्रीमियम स्ट्रैटेजी की राह इतनी आसान नहीं है। शराब का कारोबार भारत में पूरी तरह राज्य स्तर पर कंट्रोल होता है। हर राज्य की अपनी एक्साइज ड्यूटी, लाइसेंसिंग नियम और रिटेल पॉलिसी है, जो ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी को बढ़ा देती है।
निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बातें:
- डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क: सप्लाई चेन की सुगमता ही तय करेगी कि ब्रांड्स की पहुंच कितनी बड़ी है।
- मार्केटिंग खर्च: ब्रांड बिल्डिंग पर होने वाले भारी खर्च और वॉल्यूम ग्रोथ के बीच बैलेंस बनाना।
- कीमतें: रॉ मटेरियल जैसे Extra Neutral Alcohol (ENA) की कीमतों में बदलाव और राज्य सरकारों की एक्साइज पॉलिसी पर नजर रखना जरूरी है।
जिम का मार्केट फिलहाल करीब 22 लाख केस का है, जो कि 1.4 करोड़ केस वाले वोदका मार्केट के मुकाबले छोटा है, लेकिन इसमें ग्रोथ की संभावनाएं काफी अधिक हैं। आने वाली तिमाहियों के रिजल्ट्स में यह देखना होगा कि क्या प्रीमियम सेगमेंट का यह बदलाव ऑपरेटिंग मार्जिन्स में स्थायी सुधार ला पाता है या नहीं।
