Indian Snack Market Shift: 86% Consumers Demand Protein

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Snack Market Shift: 86% Consumers Demand Protein

2026 की Farmley रिपोर्ट बताती है कि 86% भारतीय स्नैक उपभोक्ता अब प्रोटीन सामग्री और पारदर्शी सामग्री लेबल को प्राथमिकता देते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक खरीदारी की ओर यह बदलाव पारंपरिक स्नैक ब्रांडों पर उत्पादों को फिर से तैयार करने का दबाव डाल रहा है, जिसमें एक तिहाई उपभोक्ता स्वस्थ, क्लीन-लेबल विकल्पों के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े?

Farmley की 2026 हेल्दी स्नैकिंग रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय स्नैक बाज़ार में उपभोक्ताओं के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 6,000 से अधिक लोगों के सर्वेक्षण में पाया गया कि 86% उपभोक्ता अब अपने स्नैक विकल्पों में प्रोटीन को एक महत्वपूर्ण घटक मानते हैं। इसके अलावा, 62% उत्तरदाताओं ने सामग्री की पारदर्शिता को ब्रांड चयन में सबसे महत्वपूर्ण कारक बताया।

क्लीन लेबल और नेचुरल स्वीटनर्स की ओर रुझान

परिष्कृत शर्करा (refined sugars) पर बहुत अधिक निर्भर उत्पादों की मांग में स्पष्ट गिरावट आई है। लगभग 61% उत्तरदाता अब गुड़ (jaggery) और खजूर (dates) जैसे प्राकृतिक मिठास (natural sweeteners) वाले स्नैक्स पसंद करते हैं। यह रुझान बताता है कि उपभोक्ता 'क्लीन लेबल' यानी कम से कम, पहचानने योग्य सामग्री वाले उत्पादों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे कंपनियों को कृत्रिम योजकों (artificial additives) और प्रोसेस्ड फिलर्स से दूर जाना पड़ रहा है।

बदलते सेल्स चैनल और उपभोक्ता प्रभाव

हालांकि पारंपरिक रिटेल चैनल अभी भी स्नैक बिक्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्विक कॉमर्स (quick commerce) का उदय ब्रांडों के ग्राहकों तक पहुंचने के तरीके को बदल रहा है। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म मुख्य टचप्वाइंट बन रहे हैं, जिसमें 31% उत्तरदाताओं ने स्नैक खरीद के लिए Blinkit को प्राथमिकता दी। ब्रांड अब इन चैनलों के अनुरूप अपनी पैकेजिंग को अनुकूलित कर रहे हैं, 30% उपभोक्ता री-सीलेबल पैकेजिंग (resealable packaging) की सुविधा को एक प्रमुख differentiator मानते हैं। पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग (Eco-friendly packaging) भी 25% खरीद निर्णयों को प्रभावित करती है।

स्नैक निर्माताओं के लिए व्यावसायिक वास्तविकता

भारतीय खाद्य और पेय क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ियों के लिए, इस बदलाव का मतलब है कि प्रीमियमकरण (premiumization) अब वैकल्पिक नहीं है। जो कंपनियां फंक्शनल सामग्री (functional ingredients) को शामिल करने या स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी प्रदान करने में विफल रहती हैं, वे नए, स्वास्थ्य-केंद्रित ब्रांडों के सामने बाज़ार हिस्सेदारी खोने का जोखिम उठाती हैं। रिपोर्ट में बच्चों के लिए लक्षित स्नैक्स या महिलाओं के स्वास्थ्य की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप स्नैक्स जैसे विशेष क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है, जहां उपभोक्ता उच्च मूल्य संवेदनशीलता (price sensitivity) दिखाते हैं।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

निवेशकों को यह देखना चाहिए कि स्थापित FMCG कंपनियां इन स्वास्थ्य मांगों को पूरा करने के लिए अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को कैसे समायोजित करती हैं। मुख्य निगरानी योग्य बिंदुओं में स्वास्थ्य-स्नैकिंग सेगमेंट में नए उत्पाद लॉन्च की दर, प्राकृतिक सामग्री सोर्सिंग में निवेश और डिजिटल परिवर्तन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनियां महंगी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करते हुए लाभ मार्जिन बनाए रख सकती हैं।

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