Indian Single Malt Whisky: भारतीय व्हिस्की का जलवा! 2025 में बिकीं **5 लाख** केस, **92%** मार्केट पर कब्ज़ा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Single Malt Whisky: भारतीय व्हिस्की का जलवा! 2025 में बिकीं **5 लाख** केस, **92%** मार्केट पर कब्ज़ा

भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की के लिए 2025 एक ऐतिहासिक साल रहा। इस दौरान **5 लाख** केस की बिक्री के साथ, घरेलू ब्रांड्स ने मार्केट का **92%** हिस्सा अपने नाम कर लिया है। यह दिखाता है कि भारतीय उपभोक्ता अब प्रीमियम स्पिरिट्स की ओर बढ़ रहे हैं।

Detailed Coverage

भारतीय स्पिरिट्स मार्केट में बड़ा बदलाव

भारत का स्पिरिट्स मार्केट एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जहाँ स्थानीय रूप से निर्मित सिंगल माल्ट व्हिस्की की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। 2025 में, भारतीय सिंगल माल्ट की बिक्री लगभग 5 लाख केस तक पहुँच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 22% की वृद्धि दर्शाती है। यह ग्रोथ इस बात का सबूत है कि भारतीय उपभोक्ता प्रीमियम और खास व्हिस्की के शौकीन बन रहे हैं।

देसी ब्रांड्स का जलवा

फिलहाल, भारत के अपने ब्रांड्स इस ट्रेंड को लीड कर रहे हैं। इंडि (Indri), अमृत (Amrut), रामपुर (Rampur) और पॉल जॉन (Paul John) जैसे जाने-माने नाम, साथ ही सोलन गोल्ड (Solan Gold) और जियानचंद (GianChand) जैसे नए प्लेयर्स ने भी मल्टीनेशनल कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है। इन भारतीय कंपनियों ने 2025 में करीब 4.65 लाख केस बेचे। इसकी तुलना में, डियाजियो (Diageo) और पर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard) जैसी ग्लोबल कंपनियों की लोकल प्रोडक्शन वाली व्हिस्की जैसे गोदावन (Godawan) और लॉन्गिट्यूड 77 (Longitude 77) का हिस्सा केवल 35,000 केस रहा।

यह सफलता एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है। पिछले दो सालों में, 'मेड इन इंडिया' सिंगल माल्ट कैटेगरी की बिक्री 2023 में 3.5 लाख केस से बढ़कर 2025 में 5 लाख केस हो गई है, जो कुल 43% की बढ़ोतरी है। भारत की अनोखी ट्रॉपिकल जलवायु में परिपक्व हुई व्हिस्की की क्वालिटी और खास फ्लेवर को अब कंज्यूमर पहचानने लगे हैं।

क्वालिटी और मार्केट पोजिशनिंग

भरोसा और क्वालिटी बनाए रखने के लिए, इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन (IMWA) ने हाल ही में एक होलोग्राम सर्टिफिकेशन ट्रेडमार्क लॉन्च किया है। इसका मकसद घरेलू माल्ट की प्रामाणिकता की जांच करना और उन्हें इंटरनेशनल प्रोडक्शन स्टैंडर्ड्स के अनुरूप लाना है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन प्रोडक्ट्स की प्रीमियम वैल्यू, जो आमतौर पर ₹2,300 से ₹8,000 के बीच बिकती हैं, स्पिरिट्स सेक्टर में हायर-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर एक स्थायी कदम का संकेत देती है।

हालांकि भारतीय ब्रांड्स डोमेस्टिक-निर्मित कैटेगरी में आगे हैं, लेकिन इंपोर्टेड सिंगल माल्ट्स भी 3.5 लाख केस की बिक्री के साथ एक मजबूत दावेदार बने हुए हैं। कुल मिलाकर, लोकल और इंपोर्टेड सिंगल माल्ट्स का कंबाइंड मार्केट 8.5 लाख केस तक पहुँच गया है। निवेशकों के लिए, यह देखना अहम होगा कि क्या डोमेस्टिक प्रोड्यूसर्स अपना यह मार्केट शेयर बनाए रख पाते हैं, खासकर जब मल्टीनेशनल कंपनियाँ प्रीमियम सेगमेंट में अपना निवेश और पोर्टफोलियो बढ़ा रही हैं। भविष्य की ग्रोथ इस बात पर भी निर्भर करेगी कि ब्रांड्स प्रोडक्शन कैपेसिटी को कैसे मैनेज करते हैं और बदलते स्टेट-लेवल एक्साइज पॉलिसीज से कैसे निपटते हैं, जो अक्सर भारत में शराब के डिस्ट्रीब्यूशन और प्राइसिंग को प्रभावित करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.