भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की की असल पहचान अब हॉलमार्क से होगी। इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन (IMWA) ने इस प्रीमियम प्रोडक्ट की क्वालिटी और ऑथेंटिसिटी सुनिश्चित करने के लिए एक नया हॉलमार्क सर्टिफिकेशन लॉन्च किया है।
क्या है नया हॉलमार्क?
इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन (IMWA) ने भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की के लिए एक खास हॉलमार्क सर्टिफिकेशन की शुरुआत की है। यह सर्टिफिकेशन केवल उन्हीं व्हिस्की को मिलेगा जो उत्पादन के सख्त नियमों का पालन करेंगी।
क्या हैं नियम?
- व्हिस्की 100% माल्टेड बार्ली से बनी होनी चाहिए।
- सिंगल इंडियन डिस्टिलरी में कॉपर पॉट स्टिल्स में डिस्टिल्ड हो।
- कम से कम 3 साल तक 700 लीटर से बड़े न हों, ऐसे ओक कास्क में एज (mature) की गई हो।
- पूरा प्रोडक्शन प्रोसेस, मैशिंग से लेकर बॉटलिंग तक, भारत में ही होना चाहिए।
- न्यूट्रल स्पिरिट्स या मोलासेस (गुड़ की शीरा) का इस्तेमाल पूरी तरह से बैन है।
प्रीमियम स्पिरिट्स के लिए क्यों है ज़रूरी?
भारतीय शराब इंडस्ट्री में इन दिनों 'प्रीमियम' प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है। लोग सस्ते, मास-मार्केट स्पिरिट्स की जगह महंगे सिंगल माल्ट्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। IMWA का यह कदम मार्केट में कन्फ्यूजन को कम करने में मदद करेगा।
यह सर्टिफिकेशन प्रीमियम ब्रांड्स को नकली या सस्ते 'ब्लेंडेड' व्हिस्की से मुकाबला करने में मदद करेगा, जिनमें अक्सर आर्टिफिशियल फ्लेवर या ग्रेन-बेस्ड स्पिरिट्स का इस्तेमाल होता है। जब ग्राहक असली, हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट को आसानी से पहचान पाएंगे, तो वे प्रीमियम कीमत चुकाने को भी तैयार होंगे, जिससे प्रोड्यूसर्स के प्रॉफिट मार्जिन को सहारा मिलेगा।
लिस्टेड कंपनियों पर असर?
भारतीय स्पिरिट्स मार्केट में कई लिस्टेड कंपनियां प्रीमियम और लग्जरी व्हिस्की सेगमेंट में अपनी पैठ बढ़ा रही हैं। Radico Khaitan (अपने 'Rampur' सिंगल माल्ट के लिए जानी जाती है) और Piccadily Agro Industries (जो 'Indri' ब्रांड बनाती है) जैसे नाम इस सेगमेंट के अहम खिलाड़ी हैं।
ये कंपनियां इंपोर्टेड व्हिस्की और दूसरी डोमेस्टिक ब्रांड्स से भी मुकाबला करती हैं। एक स्टैंडर्ड सर्टिफिकेशन से डोमेस्टिक कंपनियों को एक मजबूत पोजिशन मिलेगी, खासकर एक्सपोर्ट मार्केट्स में जहां क्वालिटी की पहचान बहुत ज़रूरी है। इन्वेस्टर्स के लिए, यह एक संकेत है कि डोमेस्टिक सिंगल-माल्ट इंडस्ट्री मैच्योर हो रही है और ग्लोबल लेवल पर कंपीट करने के लिए अपनी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को मजबूत कर रही है।
क्या है चिंता का सबब?
हालांकि यह इनिशिएटिव पारदर्शिता के लिए एक अच्छा कदम है, पर यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि IMWA सर्टिफिकेशन फिलहाल इंडस्ट्री-लेड है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने बड़े और छोटे डिस्टिलर्स इसे अपनाते हैं।
अगर कुछ ही प्लेयर हॉलमार्क का इस्तेमाल करते हैं, तो इसका कंज्यूमर बिहेवियर पर सीमित असर पड़ेगा। इसके अलावा, इंडस्ट्री को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि नियमों का सख्ती से पालन हो। अगर गलती से कम क्वालिटी वाले प्रोडक्ट्स को भी यह मार्क मिल जाता है, तो सर्टिफिकेशन की वैल्यू कम हो सकती है।
इन्वेस्टर्स को क्या ट्रैक करना चाहिए?
इन्वेस्टर्स को इस सर्टिफिकेशन के मार्केटिंग पर नज़र रखनी चाहिए। मुख्य बातें जिन पर ध्यान देना होगा:
- मार्केट पेनिट्रेशन: प्रमुख प्रीमियम ब्रांड्स कितनी जल्दी अपने बोतलों पर यह हॉलमार्क लगाना शुरू करते हैं।
- कंज्यूमर परसेप्शन: क्या सर्टिफिकेशन से सर्टिफाइड ब्रांड्स की सेल्स या प्राइस रियलाइजेशन में वाकई बढ़ोतरी होती है।
- इंडस्ट्री पार्टिसिपेशन: क्या डोमेस्टिक सिंगल-माल्ट इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा IMWA स्टैंडर्ड्स को अपनाता है या बाहर रहता है।
- एक्सपोर्ट ट्रेंड्स: क्या यह सर्टिफिकेशन भारतीय ब्रांड्स को इंटरनेशनल मार्केट्स में बेहतर स्वीकार्यता दिलाने में मदद करता है, जहां सिंगल-माल्ट के स्टैंडर्ड्स बहुत रेगुलेटेड होते हैं।
