Whisky Trade War: भारतीय और स्कॉटिश व्हिस्की एसोसिएशन में हुआ बड़ा समझौता, अब क्या होगा घरेलू कंपनियों का?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Whisky Trade War: भारतीय और स्कॉटिश व्हिस्की एसोसिएशन में हुआ बड़ा समझौता, अब क्या होगा घरेलू कंपनियों का?

Indian Malt Whisky Association और Scotch Whisky Association ने क्वालिटी और ट्रेड के लिए हाथ मिलाया है। इंडिया-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत स्कॉच पर इम्पोर्ट ड्यूटी **150%** से घटकर **40%** होने से घरेलू शराब कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत और यूके के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद शराब बाजार में समीकरण बदल रहे हैं। अब Indian Malt Whisky Association (IMWA) और Scotch Whisky Association (SWA) ने एक सहयोग समझौते (Cooperation Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका लक्ष्य ट्रेड स्टैंडर्ड्स और प्रोडक्ट ऑथेंटिसिटी को बेहतर बनाना है।

इम्पोर्ट ड्यूटी घटने से बढ़ेगी टक्कर

इस समझौते का सबसे बड़ा असर स्कॉच व्हिस्की की कीमतों पर पड़ेगा। पहले इस पर 150% तक ड्यूटी लगती थी, जिसे अब घटाकर 40% के लेवल पर लाया जा रहा है। साल 2025 में भारत में स्कॉच की खपत 22 करोड़ बोतल के पार पहुंच गई है, जिससे साफ है कि विदेशी ब्रांड्स अब घरेलू बाजार में बड़ी चुनौती पेश करने को तैयार हैं।

घरेलू कंपनियों के लिए चुनौती

United Spirits, Radico Khaitan, और Allied Blenders and Distillers जैसी कंपनियों के लिए यह मुकाबला कठिन होने वाला है। चूंकि आयातित स्कॉच अब सस्ती होगी, तो प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में घरेलू कंपनियों के लिए प्राइसिंग प्रेशर बढ़ सकता है। हालांकि बड़ी कंपनियां अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर इसे संभाल सकती हैं, लेकिन छोटे और रीजनल खिलाड़ियों के लिए मुनाफे (Profit Margin) को सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण होगा।

क्या भारतीय व्हिस्की को मिलेगा फायदा?

इस एग्रीमेंट का दूसरा पहलू भारतीय माल्ट ब्रांड्स के लिए यूके मार्केट के रास्ते खुलना है। अगर भारतीय डिस्टिलरीज इंटरनेशनल मार्केट में जगह बना पाती हैं, तो यह उनके लिए गेम-चेंजर साबित होगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड वैल्यू बनाने में समय और बड़ा निवेश लगेगा।

निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर्स

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि शराब का कारोबार स्टेट-वाइज एक्साइज पॉलिसी और कच्चे माल की लागत से तय होता है। सस्ते आयातित ब्रांड्स के आने से घरेलू कंपनियां अपने दाम नहीं बढ़ा पाएंगी, जिसका असर उनकी आने वाली तिमाही नतीजों (Quarterly Results) में मार्जिन कंप्रेशन के रूप में दिख सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.