भारत की दिग्गज रिटेल कंपनियां अब आक्रामक ऑनलाइन विस्तार के बजाय मुनाफे पर फोकस कर रही हैं। बढ़ते खर्च और ग्राहकों की शिकायतों के चलते Avenue Supermarts जैसी कंपनियां अपने डिजिटल फुटप्रिंट को सीमित कर रही हैं।
भारत की प्रमुख रिटेल कंपनियां अपनी डिजिटल रणनीति पर फिर से विचार कर रही हैं। ऑनलाइन उपस्थिति बनाए रखने की भारी कीमत अब कंपनी के मुनाफे पर असर डाल रही है। बीते कुछ वर्षों में कंपनियों का ध्यान मार्केट शेयर कब्जाने पर था, लेकिन अब वे 'वैनिटी मेट्रिक्स' के बजाय दक्षता और कोर प्रॉफिट मार्जिन पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
DMart की बदली रणनीति
Avenue Supermarts (DMart) इसका बड़ा उदाहरण है। कंपनी ने अपने डिजिटल आर्म 'DMart Ready' को छोटा करते हुए इसे 24 मार्केट्स से घटाकर 11 कर दिया है। जिन शहरों में ऑपरेशनल डेंसिटी कम थी, वहां से कंपनी ने बाहर निकलने का फैसला किया है। इसकी ई-कॉमर्स सब्सिडियरी को फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹306.53 करोड़ का नेट लॉस हुआ है। अपनी गतिविधियों के लिए कंपनी अब कॉरपोरेट डेट मार्केट से ₹1,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है, जिसे ICRA से AAA रेटिंग मिली है।
सर्विस क्वालिटी और बढ़ती शिकायतें
तेजी से विस्तार ने बड़ी रिटेल चेन की ऑपरेशनल कैपेसिटी पर दबाव डाला है। Tata समर्थित कंपनी Trent को FY26 में ग्राहकों की शिकायतों में 35% की बढ़ोतरी देखनी पड़ी, जो 3,00,000 के आंकड़े को पार कर गई है। इसी तरह, V-Mart Retail और Titan की कस्टमर सर्विस पूछताछ में क्रमशः 14% और 9% का उछाल आया है। यह दर्शाता है कि डिजिटल स्टोरफ्रंट्स का इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स मैनेज करना कंपनियों के लिए चुनौती बन गया है।
प्राइसिंग मॉडल में बदलाव
Infiniti Retail (Croma) ने भी अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन प्राइसिंग को एक जैसा करना शुरू कर दिया है। अक्सर ग्राहक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल कीमत की तुलना करने के लिए करते हैं, जिससे ऑनलाइन चैनल एक 'कॉस्ट सेंटर' बन जाता है। रिटेल कंपनियां अब इसी समस्या को हल करने की कोशिश कर रही हैं। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये कंपनियां अपने ओमनीचैनल प्रेजेंस को बैलेंस करते हुए मार्जिन में सुधार कर पाती हैं या नहीं।
