भारत में नए स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ने से रिफर्बिश्ड (Refurbished) फोन के बाजार में जबरदस्त उछाल आया है। साल 2026 की पहली छमाही में जहां नए फोन की बिक्री **11%** गिरी है, वहीं रिफर्बिश्ड फोन की वॉल्यूम में **13%** का इजाफा दर्ज किया गया है।
बाजार में आया बड़ा बदलाव
स्मार्टफोन का बाजार इस समय एक बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव से गुजर रहा है। ग्लोबल मार्केट में मेमोरी और कोर कंपोनेंट्स की बढ़ती मांग के कारण नए हैंडसेट्स की औसत कीमत में 16% से 21% तक का उछाल आया है। इसी कारण अब खरीदार महंगे नए फोन के बजाय ₹20,000 से ₹45,000 की रेंज में पिछले साल के फ्लैगशिप मॉडल्स को चुनना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं।
अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर बनाम ट्रस्ट का मुद्दा
रिफर्बिश्ड मार्केट का लगभग 80% हिस्सा अभी भी अनऑर्गनाइज्ड लोकल रिटेलर्स के हाथों में है। यहां वारंटी और क्वालिटी की कोई गारंटी नहीं होती। हालांकि, Cashify और ControlZ जैसे ऑर्गेनाइज्ड प्लेटफॉर्म IMEI वेरिफिकेशन और डेटा इरेजर सर्टिफिकेशन जैसी प्रक्रिया अपनाकर भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राह आसान नहीं है।
सर्वे के अनुसार, 74% ग्राहक आज भी पुराने फोन में अपने निजी डेटा (Personal Data) के सुरक्षित रहने को लेकर डरे हुए हैं।
भविष्य की चुनौतियां और रिस्क
कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट' (CAC) है। विज्ञापन और ब्रांडिंग पर भारी खर्च करने के बावजूद अगर वे ग्राहकों का भरोसा नहीं जीत पाती हैं, तो प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है। दीपावली के बाद नए फोन की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे रिफर्बिश्ड मार्केट की मांग तो बढ़ेगी, लेकिन कंपनियों की असली सफलता इस पर टिकी होगी कि वे कितनी कुशलता से सप्लाई चेन और डेटा सिक्योरिटी को मैनेज करती हैं।
