भारत का रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) शराब बाजार दुनिया से बिल्कुल अलग रुख अपना रहा है। यहाँ लोग हल्के पेय के बजाय 12% से 15% अल्कोहल वाली ड्रिंक्स को पसंद कर रहे हैं, जिससे इस सेक्टर में 2025 में 11% की वैल्यू ग्रोथ देखी गई है।
भारतीय कंज्यूमर्स शराब के उपभोग के मामले में दुनिया भर से अलग ट्रेंड सेट कर रहे हैं। पश्चिमी देशों में जहाँ लोग लो-कैलोरी हार्ड सेल्टजर्स की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं भारत में हाई-अल्कोहल वाले पेय की मांग में जबरदस्त उछाल है। यहाँ के ग्राहक 12% से 15% ABV (अल्कोहल बाय वॉल्यूम) वाली ड्रिंक्स को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।
शानदार ग्रोथ और बड़े ब्रांड्स
इस सेक्टर की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2025 में इसने 11% की वैल्यू ग्रोथ दर्ज की है, जबकि 2022 से 2025 के बीच 6% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) रही है। IndoBevs का 'BroCode' और Sazerac का 'BuzzBallz' जैसे ब्रांड्स ने अपनी मजबूत पोजीशन बना ली है। ये पोर्टेबल और सिंगल-सर्व पैकेजिंग वाले ड्रिंक्स अब युवाओं की पहली पसंद बन चुके हैं।
रेगुलेटरी फेवर और चुनौतियां
कई राज्यों में रेगुलेटरी बदलावों ने इस सेक्टर के लिए रास्ते आसान कर दिए हैं, जहाँ 15% तक ABV वाले वाइन-बेस्ड प्रोडक्ट्स को बेहतर एक्साइज ड्यूटी स्ट्रक्चर का लाभ मिल रहा है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि भारत में शराब नीति राज्यों के हाथ में है। गोवा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पॉलिसी में कोई भी अचानक बदलाव मुनाफे पर दबाव डाल सकता है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों को अब अपनी मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन पर भी भारी खर्च करना पड़ सकता है, जो आने वाले समय में प्रॉफिट मार्जिन के लिए एक चुनौती बन सकता है।
