Poultry रिटेलर्स के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है। फीड का मुख्य आधार 'मक्का' अब **₹27-28** प्रति किलो के भाव पर पहुंच गया है, जिससे कंपनियों के मुनाफे (Profit) पर बुरा असर पड़ रहा है।
भारतीय पोल्ट्री इंडस्ट्री इस वक्त एक बड़ी मुश्किल दौर से गुजर रही है। प्रोडक्शन कॉस्ट में आई अचानक तेजी का सबसे बड़ा कारण मक्के के भाव हैं। पोल्ट्री फीड में मक्के की हिस्सेदारी 60% से 70% तक होती है। गौर करने वाली बात यह है कि साल 2019 में जो मक्का ₹12-14 प्रति किलो मिलता था, वह अब दोगुने भाव यानी ₹27-28 प्रति किलो पर बिक रहा है।\n\n### दोहरी मार: एथेनॉल और मॉनसून\nइस महंगाई के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, सरकार का एथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम, जिसकी वजह से मक्के की डिमांड काफी बढ़ गई है। दूसरा, 2026 के साउथवेस्ट मॉनसून में 13% की कमी ने फसल पैदावार को प्रभावित किया है। कंपनियों को अब दूर-दराज के इलाकों से फीड मंगाना पड़ रहा है, जिससे लॉजिस्टिक्स का खर्च भी आसमान छू रहा है।\n\n### रिटेल मार्केट का हाल\nइसका असर जमीन पर साफ दिख रहा है। Zappfresh ब्रांड की ऑपरेटर DSM Fresh Foods ने प्रोक्योरमेंट खर्च में 10% की बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी ग्राहकों पर बोझ डालने में पूरी तरह सफल नहीं रही, जिसके चलते ग्रॉस मार्जिन में 5% की गिरावट आई है। उपभोक्ता अभी भी प्राइस सेंसिटिव बने हुए हैं, जिससे कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना चुनौतीपूर्ण है।\n\n### कंपनियां क्या कर रही हैं?\nNandu’s जैसी कंपनियां अब ज्यादा इन्वेंटरी स्टॉक कर रही हैं ताकि भविष्य के सप्लाई चेन झटकों से बचा जा सके। लेकिन, यह रणनीति कैश फ्लो और स्टोरेज कॉस्ट के लिहाज से रिस्की है। अगला 3 से 6 महीने का समय भारत में मीट कंजम्पशन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, ऐसे में कंपनियों की नजरें अब फीड कॉस्ट को मैनेज करने और रिटेल प्राइजिंग को सही संतुलन देने पर टिकी हैं।
