सितंबर **2026** तिमाही में भारतीय शराब उद्योग की ग्रोथ **4.6%** रही, जो पिछले साल **6.4%** थी। प्रीमियम सेगमेंट में डिमांड बरकरार है, लेकिन महंगाई के कारण मास-मार्केट पर भारी दबाव है।
शराब उद्योग के लिए सितंबर 2026 की तिमाही चुनौतियों भरी रही है। मांग में कमी का असर यह है कि वॉल्यूम ग्रोथ घटकर 4.6% रह गई है, जो पिछले साल की इसी अवधि में 6.4% थी। महंगाई की वजह से कम आय वाले परिवारों की खर्च करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ा है।
प्रीमियम बनाम मास-मार्केट का फर्क
बाजार में अब स्पष्ट विभाजन दिख रहा है। 'प्रेसटीज और उससे ऊपर' के प्रीमियम स्पिरिट्स कैटेगरी ने 5.7% की अच्छी ग्रोथ दिखाई है, लेकिन मास-मार्केट सेगमेंट की हालत पतली है और यह सिर्फ 3.7% की रफ्तार से बढ़ पाया है। चूंकि कुल वॉल्यूम में मास-मार्केट का हिस्सा बहुत बड़ा है, इसलिए इसकी सुस्ती का असर पूरे सेक्टर के आंकड़ों पर पड़ रहा है।
कंपनियों पर असर
बड़ी कंपनियों के नतीजों में भी यह अंतर साफ है। United Spirits के पॉपुलर सेगमेंट की नेट सेल्स वैल्यू में 22.7% की गिरावट आई है। वहीं, Allied Blenders and Distillers ने वॉल्यूम में 11.1% की बढ़त दर्ज की है और 10 मिलियन केस बेचे हैं, लेकिन इसके लिए कंपनी को अपनी प्रॉफिटेबिलिटी से समझौता करना पड़ा है। कंपनी के EBITDA मार्जिन में 66 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट देखी गई है, जो बताता है कि कंपनियां मार्केट शेयर बचाने के लिए मार्जिन कम करने को मजबूर हैं।
चुनौतियां और भविष्य की राह
इन दिक्कतों के पीछे कमजोर मॉनसून से लेकर रूरल डिमांड में आई कमी तक, कई कारण हैं। इसके अलावा एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA), एनर्जी और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत से कंपनियों का मार्जिन दबाव में है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में बदलती एक्साइज पॉलिसी ने भी ऑपरेशनल मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या प्रीमियम उत्पादों की बिक्री, पॉपुलर सेगमेंट के नुकसान की भरपाई कर पाएगी या मार्जिन पर और दबाव बढ़ेगा।
