त्योहारों के कैलेंडर में बदलाव के बावजूद भारतीय जूलरी सेक्टर ने दम दिखाया है। सितंबर तिमाही में कंपनियों ने **22%** से **28%** तक का शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज किया है। अब कंपनियां लो-मार्जिन गोल्ड कॉइन्स के बजाय हाई-मार्जिन स्टडेड जूलरी पर फोकस बढ़ाकर अपना मुनाफा बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
त्योहारों के कैलेंडर में बदलाव का असर भारतीय जूलरी सेक्टर पर बेअसर रहा। जहां नवरात्र जैसे बड़े त्यौहार इस बार दिसंबर तिमाही में शिफ्ट हो गए थे, इसके बावजूद प्रमुख रिटेल ब्रांड्स ने 22% से 28% तक की दमदार ग्रोथ दर्ज की है। यह साबित करता है कि ब्रांडेड जूलरी की डिमांड मार्केट में काफी मजबूत बनी हुई है।
मार्जिन बढ़ाने की नई रणनीति
इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर है 'प्रोडक्ट मिक्स' में बदलाव। कंपनियां अब लो-मार्जिन वाले गोल्ड कॉइन्स और बार्स पर निर्भरता घटा रही हैं। उदाहरण के तौर पर, P N Gadgil Jewellers ने 22.4% की सालाना रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है। कंपनी ने गोल्ड कॉइन्स से आने वाली रेवेन्यू हिस्सेदारी को पिछले साल के 23.3% से घटाकर 15.8% कर दिया है। स्टडेड जूलरी पर ध्यान देने से कंपनियों को हर ट्रांजेक्शन पर बेहतर मार्जिन मिल रहा है।
दिग्गज खिलाड़ियों का प्रदर्शन
मार्केट लीडर Titan Company (Tanishq और CaratLane) ने जूलरी डिवीजन में 21% की ग्रोथ दिखाई है। Titan की स्टडेड जूलरी सेल में 30% से ज्यादा का उछाल देखा गया। इसके अलावा, Kalyan Jewellers का डोमेस्टिक कारोबार 27% बढ़ा, जबकि उनकी डिजिटल यूनिट Candere ने 64% की जबरदस्त तेजी दिखाई। वहीं, PC Jeweller का रेवेन्यू भी करीब 28% बढ़कर आया है।
निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
सेक्टर चमक रहा है, लेकिन निवेशकों को सोने की कीमतों में होने वाली उतार-चढ़ाव (Volatility) पर नजर रखनी चाहिए। अगर सोने के भाव बहुत ज्यादा बढ़ते हैं, तो डिमांड पर बुरा असर पड़ सकता है। साथ ही, असंगठित (Unorganized) लोकल प्लेयर्स से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा भी एक चुनौती बनी हुई है। अब सबकी नजरें तीसरी तिमाही के नतीजों पर हैं, जहां दिवाली और वेडिंग सीजन का पूरा असर देखने को मिलेगा।
