भारत का होम और हाउसहोल्ड सेक्टर तेजी से बदल रहा है और साल 2030 तक इसके **$260 बिलियन** तक पहुंचने का अनुमान है। डिजिटल दौर के नए ग्राहकों की पसंद और ओमनी-चैनल (Omnichannel) स्ट्रैटेजी इस विकास की मुख्य धुरी है।
भारतीय होम और हाउसहोल्ड सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2030 तक यह मार्केट $260 बिलियन की वैल्यू तक पहुंच सकता है। इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह ग्राहकों का व्यवहार है, जहां 80% खरीदार अब घर के सामान की तलाश सोशल मीडिया के जरिए करते हैं। इसकी एक बड़ी वजह है पहली बार घर खरीदने वालों की औसत उम्र का 40 के दशक से घटकर 30 के शुरुआती वर्षों में आना, जो डिजिटल रूप से काफी सक्रिय हैं।
ओमनी-चैनल मॉडल का बढ़ता दबदबा
अब केवल फिजिकल शोरूम या केवल ऑनलाइन स्टोर का जमाना नहीं रहा। डेटा के अनुसार, 60% ग्राहक अब शोरूम में रहते हुए भी ई-कॉमर्स ऐप्स का उपयोग करते हैं, ताकि वे रियल-टाइम में कीमतें और ऑफर्स की तुलना कर सकें। जिन रिटेलर्स ने ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल प्लानिंग टूल्स अपनाए हैं, उन्होंने अपने रेवेन्यू में 10% का उछाल और प्रोडक्ट रिटर्न में 25% की कमी दर्ज की है। यह कम रिटर्न रेट निवेशकों के लिए मुनाफे के मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिहाज से बहुत जरूरी है।
टियर-1 और टियर-2 शहरों का अंतर हुआ कम
अब सिर्फ बड़े शहरों तक ही यह मार्केट सीमित नहीं है। साल 2025 में टियर-2 शहरों के परिवारों ने होम इंटीरियर पर औसतन ₹3.9 लाख खर्च किए, जो महानगरों के खर्च का लगभग 74% है। यह बताता है कि फर्नीचर, पेंट्स और सिरेमिक जैसे सेक्टर छोटे शहरों में तेजी से पांव पसार रहे हैं।
ब्रांड लॉयल्टी और भविष्य की चुनौती
आज का ग्राहक केवल एक आइटम नहीं खरीद रहा, बल्कि 95% खरीदार अब फर्नीचर, लाइटिंग और पेंट्स जैसी चार या उससे ज्यादा कैटेगरीज में एक ही ब्रांड या इकोसिस्टम से जुड़ना पसंद करते हैं। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि डिजिटल इन्वेस्टमेंट की लागत काफी अधिक है। कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि वे डिजिटल बदलाव के साथ अपने मार्जिन को कैसे बरकरार रखती हैं, क्योंकि हर चार में से एक खरीदार अभी भी प्राइस सेंसिटिव है और वैल्यू-फॉर-मनी प्रोडक्ट्स ही उनकी प्राथमिकता हैं।
