Indian Festive Retail: महंगे कपड़ों पर भारी पड़ा Footwear! सस्ते सामान की डिमांड से रिटेल सेक्टर में हलचल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Festive Retail: महंगे कपड़ों पर भारी पड़ा Footwear! सस्ते सामान की डिमांड से रिटेल सेक्टर में हलचल

2026 के फेस्टिव सीजन में भारतीय ग्राहकों की पसंद बदल गई है। महंगाई के असर के चलते अब बजट-फ्रेंडली शॉपिंग पर जोर है, जहाँ **50%** फैशन ऑर्डर्स **₹1,000** से कम के रहे। कपड़ों को पछाड़कर फुटवियर अब डिमांड का नया इंजन बन गया है।

भारत में इस बार का फेस्टिव सीजन पुरानी परंपराओं को तोड़ते हुए दिख रहा है। बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के बीच आम आदमी अब प्रीमियम ब्रांड्स के बजाय वैल्यू-फॉर-मनी प्रोडक्ट्स को तरजीह दे रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, ऑनलाइन फैशन मार्केट में कुल ऑर्डर्स का आधा हिस्सा ₹1,000 से कम कीमत वाली वस्तुओं का रहा है।

फुटवियर ने दी कपड़ों को मात

इस साल रिटेल ट्रेंड में बड़ा बदलाव यह है कि फुटवियर ने कपड़ों की जगह ले ली है। फुटवियर कैटेगरी ने कुल ऑनलाइन ऑर्डर्स में 52.7% और कुल सेल्स वैल्यू में 58.4% की हिस्सेदारी हासिल की है। तुलनात्मक रूप से देखें तो कपड़ों (Apparel) का हिस्सा पिछले साल के 48% से घटकर अब 34.5% पर आ गया है। निवेशकों के नजरिए से यह संकेत है कि ग्राहक अब रोजमर्रा की उपयोगिता वाली चीजों पर खर्च करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

घट रहा दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनियों का दबदबा

Myntra और Flipkart की बाजार हिस्सेदारी अब कम होती दिख रही है। इनका संयुक्त मार्केट शेयर पिछले आंकड़ों के 89% से गिरकर 76.8% रह गया है। इसका मतलब है कि ग्राहक अब एक ही प्लेटफॉर्म से बंधे नहीं रहना चाहते और Amazon, AJIO व JioMart जैसे अन्य विकल्पों पर भी बेस्ट डील्स की तलाश कर रहे हैं।

इस प्रतिस्पर्धा के बीच ग्राहकों को लुभाने के लिए ई-कॉमर्स कंपनियां औसतन 46% तक की भारी छूट दे रही हैं। यह भले ही वॉल्यूम बढ़ा रहा हो, लेकिन आने वाली तिमाही नतीजों में यह कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर चोट कर सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

Tier 2 शहरों से 35% ऑर्डर मिलने के बावजूद, सबसे बड़ी चुनौती प्रॉफिटेबिलिटी को बनाए रखने की है। अब रिटेल कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि वे बिना भारी डिस्काउंट के सेल्स वॉल्यूम कैसे बरकरार रखेंगी। निवेशकों को कंपनियों की अगली मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह समझा जा सके कि क्या वे मार्जिन के साथ विकास की रफ्तार को मैनेज कर पा रही हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.