AI से उम्मीदें बढ़ीं, पर असल इस्तेमाल में अभी वक्त
Goldman Sachs के मुताबिक, जेनेरेटिव AI अकेले 2030 तक भारत की GDP में $1.2 से $1.5 ट्रिलियन का इजाफा कर सकता है। इस बड़ी संभावना को देखते हुए, भारत के FMCG सेक्टर में AI पर बजट और विस्तार की योजनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। रिसर्च बताती है कि कंपनियां AI को स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण मानकर इस पर ज्यादा खर्च कर रही हैं। Hindustan Unilever (HUL) जैसी कंपनियों ने अपने AI मार्केटिंग सिस्टम 'Project Jarvis' से परफॉर्मेंस में सुधार दिखाया है। इससे उम्मीद है कि AI सप्लाई चेन से लेकर मार्केटिंग तक, हर जगह प्रोडक्टिविटी बढ़ाएगा और ऑपरेशंस को精緻 (refined) बनाएगा।
लेकिन, सिर्फ AI टूल्स में पैसा लगाने से इनका गहरा और प्रभावी इस्तेमाल पक्का नहीं होता। अभी भी एक बड़ा गैप है, जहां कंपनियां AI टूल्स तो इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन वे अपने कोर बिजनेस मॉडल को बदलने के बजाय मौजूदा प्रक्रियाओं में छोटे-मोटे सुधार कर पा रही हैं। इससे बड़े बदलावों के बजाय छोटे-मोटे फायदे ही मिल रहे हैं।
भविष्य की टेक्नोलॉजी पर टिकी हैं हाई वैल्यूएशंस
भारत की टॉप FMCG कंपनियों का मार्केट कैप काफी बड़ा है। Hindustan Unilever का मार्केट कैप करीब ₹5.5 लाख करोड़ है और इसका P/E रेशियो लगभग 50 के आसपास है। वहीं, ITC का मार्केट कैप लगभग ₹4 लाख करोड़ और P/E 19 है। Nestle India, Britannia Industries, और Godrej Consumer Products जैसी कंपनियां भी काफी ऊंचे P/E पर ट्रेड कर रही हैं (लगभग 81, 65, और 92)। ये वैल्यूएशंस BSE FMCG सेक्टर के औसत P/E 35.0 से काफी ज्यादा हैं। यह दिखाता है कि निवेशक इन कंपनियों से भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, जो आंशिक रूप से AI जैसी टेक्नोलॉजी से मुनाफे और मार्केट पोजीशन में सुधार से आएगी। इन ऊंचे स्टॉक प्राइस के चलते, कंपनियों पर AI की एडवांस क्षमताओं को साबित करने का भारी दबाव है।
AI को अपनाने में बड़ी बाधाएं
AI से जुड़ी उम्मीदें अक्सर इसकी इम्प्लीमेंटेशन (लागू करने) में आने वाली मुश्किलों पर भारी पड़ती हैं। 77% भारतीय कंपनियों का मानना है कि ROI (निवेश पर रिटर्न) साबित करना AI के इस्तेमाल को बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा, डेटा से जुड़ी बेसिक समस्याएं भी बनी हुई हैं: खराब डेटा क्वालिटी ( 60%), डेटा सुरक्षा को लेकर चिंताएं ( 54%), और डेटा तक पहुंचने में कठिनाई ( 50% ) AI की सटीकता और उपयोगिता को सीमित कर रही हैं।
टैलेंट की कमी भी एक बड़ी समस्या है। जबकि IT स्टाफ को AI का ज्ञान हो सकता है, लेकिन बिजनेस की दूसरी टीमों में इसकी जानकारी का अभाव है, जिससे एक बड़ी 'रेडीनेस गैप' पैदा होती है। रेगुलेटरी और कंप्लायंस से जुड़े मुद्दे ( 66% कंपनियों के अनुसार) भी प्रगति को धीमा कर रहे हैं। इन सब वजहों से AI टूल्स होने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के बीच एक बड़ी खाई बन गई है।
FMCG सेक्टर में AI का असर होगा असमान
भारत के FMCG सेक्टर में AI को अपनाना जारी रहेगा, लेकिन इसका असर कंपनियों पर अलग-अलग होगा। भारत का मजबूत आर्थिक विकास और बढ़ता कंज्यूमर मार्केट इनोवेशन के लिए एक उपजाऊ जमीन है। हालांकि, कॉम्पिटिटिव एज (प्रतिस्पर्धा में बढ़त) हासिल करना केवल AI को अपनाने से ज्यादा, डेटा, टैलेंट और रेगुलेशन जैसी चुनौतियों से निपटने की कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगा। जो कंपनियां इन बाधाओं को सफलतापूर्वक पार कर लेंगी, वे बाजार में आगे रहेंगी, जबकि बाकी पीछे छूट सकती हैं। AI अब सिर्फ एफिशिएंसी के लिए ही नहीं, बल्कि कंपनी के बने रहने और आगे बढ़ने के लिए भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनता जा रहा है।
