Indian Durables Sector: अब 'अफोर्डेबल प्रीमियम' का दौर, कंपनियां बदल रही हैं रणनीति

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Durables Sector: अब 'अफोर्डेबल प्रीमियम' का दौर, कंपनियां बदल रही हैं रणनीति

भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां अब 'अफोर्डेबल प्रीमियम' स्ट्रेटजी पर फोकस कर रही हैं। ग्राहक अब AI और एनर्जी एफिशिएंसी जैसे प्रीमियम फीचर्स के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार नहीं हैं, जिसके चलते कंपनियां अब प्राइस बढ़ाने के बजाय मैन्युफैक्चरिंग एफिशिएंसी सुधारने पर जोर दे रही हैं।

भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स मार्केट अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कंपनियां अब ग्राहकों की बदलती पसंद को देखते हुए अपने बिजनेस मॉडल को रीअलाइन कर रही हैं। स्मार्ट फीचर्स की डिमांड तो है, लेकिन ग्राहक अब कीमत को लेकर काफी सचेत (Price Sensitive) हो गए हैं।

इनोवेशन और लागत का संतुलन

बड़ी कंपनियां अब केवल ग्लोबल फीचर्स को कॉपी करने के बजाय भारतीय माहौल के हिसाब से प्रोडक्ट्स को कस्टमाइज कर रही हैं। Daikin जैसी कंपनियां अब ऐसे प्रोडक्ट्स ला रही हैं जो परफॉर्मेंस में प्रीमियम हों लेकिन दाम आम आदमी की जेब के अनुकूल। वहीं, Atomberg Technologies 'फ्रुगल इनोवेशन' (Frugal Innovation) के जरिए कम लागत में हाई-एंड फीचर्स देने की कोशिश कर रही है।

मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव और एफिशिएंसी

बाजार में अब दाम बढ़ाना आसान नहीं रह गया है, जिसका सीधा असर प्रॉफिट मार्जिन पर दिख रहा है। Syrma SGS Technology जैसे प्लेयर्स का मानना है कि अब प्रॉफिट बढ़ाने का एकमात्र तरीका 'शॉप फ्लोर' यानी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को और ज्यादा किफायती बनाना है। आज का जागरूक ग्राहक ब्रांड वैल्यू से ज्यादा वैल्यू-फॉर-मनी पर भरोसा कर रहा है।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

इन्वेस्टर्स को अब यह देखना होगा कि कौन सी कंपनियां क्वालिटी से समझौता किए बिना अपना मार्जिन बचा पाती हैं। आने वाली तिमाहियों के रिजल्ट्स ही यह तय करेंगे कि कंपनियों की यह 'कॉस्ट-कटिंग' और 'अफोर्डेबल प्रीमियम' की रणनीति मार्केट शेयर बनाए रखने में कितनी कारगर साबित होती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.