भारतीय शादियों का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है! डेस्टिनेशन वेडिंग्स (Destination Weddings) की मांग लगातार बढ़ रही है और अनुमान है कि 2028 तक ये कुल शादियों का **32%** हिस्सा होंगी। फिलहाल यह आंकड़ा **25%** है। डोमेस्टिक डेस्टिनेशन वेडिंग्स का औसत बजट अब **₹58 लाख** तक पहुंच गया है, जिससे हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल सेक्टर को जबरदस्त फायदा हो रहा है।
Detailed Coverage
डेस्टिनेशन वेडिंग्स का बढ़ता क्रेज
भारतीय वेडिंग इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लेटेस्ट इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, अगले तीन सालों में डेस्टिनेशन सेलिब्रेशन्स कुल वेडिंग मार्केट का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बन जाएंगे। यह मौजूदा स्थिति से काफी बड़ी छलांग है, जहां अभी लगभग हर चौथी शादी घर से बाहर किसी खास लोकेशन पर होती है।
हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल पर असर
आजकल कपल्स छोटी, एक्सपीरियंस-बेस्ड शादियों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। इसी के चलते वेडिंग बजट का आवंटन भी बदल रहा है। डोमेस्टिक डेस्टिनेशन वेडिंग का औसत खर्च पिछले साल के मुकाबले 8% बढ़कर करीब ₹58 लाख हो गया है। वहीं, इंटरनेशनल डेस्टिनेशन वेडिंग्स का खर्च ₹1.5 करोड़ से भी ऊपर जा रहा है। शादियों के दिनों की संख्या भी बढ़ी है, जो औसतन 3.2 दिन तक चल रही हैं। इसके अलावा, वेलनेस एक्टिविटीज, खास डाइनिंग और गेस्ट एक्सपीरियंस पर भी फोकस बढ़ रहा है।
शॉर्ट-हॉल डेस्टिनेशंस की ओर झुकाव
शादी की प्लानिंग में लोकेशन की दूरी एक अहम फैक्टर है। करीब 50% कपल्स ऐसी जगहों को पसंद कर रहे हैं जहां फ्लाइट का समय 2 से 4 घंटे का हो। इसी वजह से श्रीलंका एशियाई मार्केट में एक बड़ा बेनिफिशियरी बनकर उभरा है। भारत से नजदीकी और मजबूत हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते श्रीलंका में लग्जरी वेडिंग प्लानर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है। अनुमान है कि श्रीलंका में वेन्यू बुकिंग्स में सालाना 20% से 25% तक की ग्रोथ देखी जा सकती है।
निवेशकों के लिए मौके और जोखिम
डेस्टिनेशन वेडिंग्स का बढ़ता चलन निवेशकों के लिए कई मौके ला रहा है। लग्जरी हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, खासकर पॉपुलर डेस्टिनेशन हब्स में मौजूद होटल चेन्स को इसका सीधा फायदा होगा। साथ ही, मल्टी-डे, हाई-बजट इवेंट्स को मैनेज करने वाली स्पेशलाइज्ड इवेंट मैनेजमेंट और ट्रैवल सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के रेवेन्यू में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए। जैसे-जैसे ये इवेंट्स एक्सपीरियंस-बेस्ड होते जा रहे हैं, सर्विस प्रोवाइडर्स के मार्जिन प्रीमियम लॉजिस्टिक्स और हाई-एंड वेंडर कोऑर्डिनेशन की बढ़ती लागतों को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेंगे। इसके अलावा, यह इंडस्ट्री इकोनॉमिक कंडीशंस के प्रति संवेदनशील है। कंज्यूमर सेंटिमेंट में कोई भी बड़ी गिरावट खर्चों में कटौती या बड़े डेस्टिनेशन इवेंट्स की प्रॉफिटेबिलिटी को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है। सबसे अहम बात यह ट्रैक करना होगा कि क्या हॉस्पिटैलिटी फर्म्स इन लंबे और जटिल वेडिंग इवेंट्स को मैनेज करते हुए अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती हैं या नहीं।
