भारतीय डेयरी कंपनियां अब पनीर और दही जैसे हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स पर दांव लगा रही हैं। हालांकि, प्योर-प्ले VAP कंपनियों और ट्रेडिशनल हाइब्रिड प्लेयर्स के बीच वैल्युएशन का बड़ा अंतर निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या यह प्रीमियम टिकाऊ है?
भारतीय डेयरी उद्योग में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनियां अब लिक्विड मिल्क के पतले मार्जिन वाले बिजनेस से हटकर पनीर, दही और चीज जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स (VAP) की तरफ बढ़ रही हैं। यह सिर्फ डाइवर्सिफिकेशन नहीं है, बल्कि कच्चे दूध की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचने और बेहतर मुनाफा कमाने की एक कोशिश है।
वैल्युएशन का फासला
सेक्टर का ट्रेंड तो साफ है, लेकिन बाजार की नजरों में इन कंपनियों की कीमत अलग-अलग है। Milky Mist जैसी प्योर-प्ले VAP कंपनी 133x के ट्रेलिंग अर्निंग मल्टीपल पर ट्रेड कर रही है। वहीं, Dodla Dairy और Heritage Foods जैसे हाइब्रिड ऑपरेटर्स (जो दूध और VAP दोनों बेचते हैं) काफी सस्ते में, यानी 25x से 29x के मल्टीपल पर मिल रहे हैं। फिस्कल ईयर 2028 के अनुमानों को देखें, तो भी हाइब्रिड प्लेयर्स 20x के आसपास ही बने हुए हैं, जो Milky Mist के मुकाबले काफी कम है।
मुनाफे का अंतर और सच्चाई
यह अंतर ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी (EBITDA margin) से पैदा होता है। जून 2027 तिमाही में Milky Mist का मार्जिन 14.9% था, जबकि Heritage Foods का 4.6% और Dodla Dairy का 5.4% रहा। हाइब्रिड कंपनियों का मार्जिन इसलिए कम है क्योंकि लिक्विड मिल्क एक हाई-वॉल्यूम लेकिन लो-मार्जिन कमोडिटी बिजनेस है।
कैपिटल का जोखिम
डेयरी बिजनेस में बहुत ज्यादा पैसा फंसाना पड़ता है (asset-heavy)। पनीर या दही जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स के लिए नई फैक्ट्रियां, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स पर भारी खर्च करना पड़ता है।
जैसे ही Milky Mist नए विस्तार के दौर में प्रवेश कर रही है, बाजार के सामने सवाल यह है कि क्या यह आक्रामक एक्सपेंशन सही रिटर्न दे पाएगा? निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अगर कैपिटल खर्च के अनुपात में कैश फ्लो नहीं बढ़ा, तो मुनाफा दबाव में आ सकता है। लंबी अवधि के लिए VAP की ओर बढ़ना सही है, लेकिन कंपनियों को अपने बढ़े हुए रेवेन्यू को लगातार कैश फ्लो में बदलना होगा, न कि सिर्फ टॉप-लाइन ग्रोथ के पीछे भागना होगा।
