भारत के कई D2C ब्रांड्स अब त्योहारी डिस्काउंट की रणनीति छोड़कर प्रोडक्ट क्वालिटी और कस्टमर रिटेंशन पर फोकस कर रहे हैं। बढ़ते विज्ञापन खर्च के बीच, प्रॉफिट मार्जिन सुधारने के लिए यह एक बड़ा बदलाव है।
भारतीय डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) कंपनियां अपनी ग्रोथ की रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही हैं। अब तक ये ब्रांड्स नए ग्राहकों को लुभाने के लिए भारी-भरकम डिस्काउंट पर निर्भर थे, लेकिन डिजिटल विज्ञापनों और ग्राहकों को जोड़ने की बढ़ती लागत ने इस मॉडल को मुनाफे के लिए नुकसानदेह बना दिया है। अब ये कंपनियां कीमत की जंग के बजाय बेहतर क्वालिटी और डिजाइन के जरिए अपना बिजनेस मॉडल मजबूत कर रही हैं।
डिस्काउंट से रिटेंशन की ओर
कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (CAC) बढ़ने के कारण ब्रांड्स के लिए हर समय डिस्काउंट देना महंगा साबित हो रहा है। कॉफी रिटेलर Sleepy Owl ने अपनी रणनीति बदलते हुए त्योहारी इवेंट्स का इस्तेमाल केवल ब्रांड परिचय के लिए करना शुरू किया है। कंपनी ने अब प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च करना शुरू कर दिया है। इसका असर यह है कि पिछले एक साल में लॉन्च हुई नई प्रोडक्ट लाइन्स कुल नेट रेवेन्यू का करीब 20% हिस्सा बन गई हैं।
वफादार ग्राहकों पर फोकस
फैशन रिटेलर Theater xyz जैसे ब्रांड्स अब सेल्स वॉल्यूम के बजाय 'रिपीट कस्टमर्स' (Repeat Shoppers) पर नजर रख रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी की सर्दियों की कुल बिक्री का करीब 40% उन लोगों से आ रहा है जो पहले भी ब्रांड से शॉपिंग कर चुके हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय ग्राहक अब अस्थायी ट्रेंड्स के बजाय टिकाऊ और क्लासिक प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
निवेशकों को यह समझना होगा कि वॉल्यूम-आधारित ग्रोथ से क्वालिटी-आधारित ग्रोथ की ओर यह बदलाव लॉन्ग-टर्म बिजनेस हेल्थ के लिए जरूरी है। हालांकि, भारतीय बाजार में ग्राहकों की 'प्राइस सेंसिटिविटी' एक बड़ा जोखिम है। यदि प्रोडक्ट की क्वालिटी बढ़ी हुई कीमतों को जस्टिफाई नहीं कर पाती है, तो मांग गिर सकती है। साथ ही, FMCG और बड़ी रिटेल कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच, इन ब्रांड्स को अपनी विस्तार लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाना होगा।
