Indian Brands: फिल्म स्टार्स की चमक फीकी, अब डिजिटल क्रिएटर्स पर दांव लगा रही हैं कंपनियां

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Brands: फिल्म स्टार्स की चमक फीकी, अब डिजिटल क्रिएटर्स पर दांव लगा रही हैं कंपनियां

भारत का **₹1,350 करोड़** का एंडोर्समेंट मार्केट अब बदल रहा है। अब कंपनियां बड़े फिल्म स्टार्स के बजाय डिजिटल क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को ज्यादा तरजीह दे रही हैं, ताकि मार्केटिंग पर खर्च को बेहतर रिजल्ट में बदला जा सके।

भारतीय सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ₹1,350 करोड़ के इस बाजार में अब कंपनियां अपने विज्ञापनों के लिए फिल्म सितारों की जगह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल क्रिएटर्स को चुन रही हैं। खास तौर पर FMCG और पर्सनल केयर कंपनियां अब बड़े विज्ञापनों के बजाय सीधे डिजिटल नेटवर्क से जुड़ना पसंद कर रही हैं।

क्यों बदल रही है रणनीति?

कॉर्पोरेट जगत अब इस बात पर मंथन कर रहा है कि क्या एक बड़े सेलिब्रिटी पर करोड़ों खर्च करने का वाकई रिटर्न मिलता है? पारंपरिक विज्ञापनों के मुकाबले डिजिटल कैंपेन अधिक सटीक डेटा और कन्वर्जन (Conversion) प्रदान करते हैं। कम लागत में ज्यादा प्रभावशाली जुड़ाव (Engagement) के कारण कंपनियां अब अपना बजट बड़े सितारों से हटाकर छोटे लेकिन प्रभावी डिजिटल क्रिएटर्स की ओर मोड़ रही हैं।

क्रिकेटर्स अभी भी पहली पसंद

हालांकि फिल्म सितारों की चमक कुछ फीकी पड़ी है, लेकिन क्रिकेटर्स अभी भी इस रेस में आगे हैं। Virat Kohli और MS Dhoni जैसे खिलाड़ी अपनी नियमित मौजूदगी और IPL जैसे टूर्नामेंट के कारण ब्रांड्स के लिए भरोसे का दूसरा नाम बने हुए हैं। आम जनता के बीच उनकी ऑर्गेनिक पहुंच को टक्कर देना फिल्मी सितारों के लिए मुश्किल बना हुआ है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) की पहल

Hindustan Unilever जैसी दिग्गज कंपनियां अब डिजिटल-नेटिव ऑडियंस के बीच अपनी साख जमाने के लिए क्रिएटर्स की कहानियों पर जोर दे रही हैं। डेटा बताता है कि मार्केटिंग बजट का एक बड़ा हिस्सा पहले ही इस दिशा में शिफ्ट हो चुका है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

हालांकि यह रणनीति मुनाफे के मार्जिन (Profit Margin) को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन यह अपने साथ नए जोखिम भी लाती है। सौ अलग-अलग क्रिएटर्स को मैनेज करना एक बड़े सेलिब्रिटी को साइन करने से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, ब्रांड की इमेज और कैंपेन की क्वालिटी पर नजर रखना अब कंपनियों के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन गया है। आने वाली तिमाही के नतीजों में यह साफ हो जाएगा कि डिजिटल मार्केटिंग की इस नई दौड़ का असर कंपनियों के मुनाफे और कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट पर कितना पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.