भारत में कंज्यूमर ब्रांड्स गट हेल्थ (Gut Health) यानी पाचन तंत्र को बेहतर बनाने वाले नए प्रोडक्ट्स जैसे प्रोबायोटिक्स (Probiotics) और कोम्बुचा (Kombucha) लॉन्च कर रहे हैं। यह एक बड़े होते मार्केट का संकेत है। हालांकि, **88%** भारतीय गट वेलनेस को महत्व देते हैं, पर स्पेशलाइज्ड सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल अभी शुरुआती दौर में है, जिससे कंपनियों के लिए लंबी अवधि की ग्रोथ का मौका बन रहा है।
पाचन स्वास्थ्य पर भारतीय ब्रांड्स का फोकस
भारतीय फूड, बेवरेज (Beverage) और सप्लीमेंट कंपनियां अब अपने बिजनेस ग्रोथ के अगले बड़े मौके के तौर पर डाइजेशन (Digestion) यानी पाचन स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। प्रोटीन सेगमेंट की पॉपुलैरिटी के बाद, अब ये कंपनियां प्रोबायोटिक्स, कोम्बुचा और केफिर (Kefir) जैसे फर्मेंटेड (Fermented) ड्रिंक्स और हाई-फाइबर सप्लीमेंट्स को अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में शामिल कर रही हैं। इनका मकसद ऐसे मार्केट को कैप्चर करना है जहाँ लोगों में जागरूकता तो बहुत है, लेकिन स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल अभी कम है।
जागरूकता और इस्तेमाल में बड़ा गैप
मार्केट के आंकड़े बताते हैं कि 88% भारतीय गट हेल्थ की अहमियत समझते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग अभी भी पाचन को ठीक रखने के लिए एक्सरसाइज और खान-पान में बदलाव जैसे पारंपरिक तरीकों पर ही निर्भर हैं। इसका मतलब है कि गट हेल्थ प्रोडक्ट्स का मार्केट अभी अपनी शुरुआती स्टेज में है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे ग्राहकों को बेहतर पाचन स्वास्थ्य की चाहत से लेकर पैक्ड सॉल्यूशंस खरीदने तक कैसे लाएं। जो कंपनियां इन प्रोडक्ट्स को एक आम आदत बना पाएंगी, वही सफल होंगी, न कि उन्हें सिर्फ एक खास मौके का प्रोडक्ट बनाकर रखेंगी।
स्ट्रैटेजिक बदलाव और मार्केट ड्राइवर्स
एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया प्रोटीन सप्लीमेंट बूम (Supplement Boom) इस ट्रेंड के पीछे एक बड़ा कारण है। जैसे-जैसे ज्यादा भारतीय हाई-प्रोटीन डाइट अपना रहे हैं, वैसे-वैसे पाचन के लिए ज्यादा फाइबर की जरूरत भी बढ़ रही है। VAHDAM India और Fast&Up जैसी कंपनियां पहले ही अपनी प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी में इसे शामिल कर चुकी हैं। VAHDAM India ने 'Morning Clear' और 'Gut Shift' जैसे डाइजेशन से जुड़े प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं। इसी तरह, Fast&Up ने अपने स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन पोर्टफोलियो को कॉम्प्लीमेंट करने के लिए प्रोबायोटिक और फाइबर प्रोडक्ट्स में विस्तार किया है। यह स्ट्रैटेजी कंपनियों को अपने मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखने और उनके हेल्थ जर्नी में अतिरिक्त सपोर्ट देने में मदद करती है।
बेवरेज और डेयरी सेगमेंट में सबसे ज्यादा विस्तार
इस सेगमेंट में बेवरेज (Beverage) और डेयरी कंपनियों से सबसे ज्यादा लीड लेने की उम्मीद है, क्योंकि इन कैटेगरी में प्रोबायोटिक्स और फाइबर को कंज्यूमर के लिए अपनाना सबसे आसान होता है। चेन्नई की Happie Gut जैसी स्टार्टअप्स पहले से ही केफिर जैसे फर्मेंटेड मिल्क ड्रिंक्स के साथ मार्केट टेस्ट कर रही हैं। हालांकि, कंपनियों को ग्राहकों को शिक्षित करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि कई ग्राहक अभी भी प्रोबायोटिक के खास फॉर्मेट्स से अनजान हैं। इन कंपनियों का फोकस प्रोडक्ट के फायदे को इस तरह से सरल बनाना होगा कि आम खरीदार उसे आसानी से समझ सके।
भविष्य का आउटलुक और निवेशकों के लिए जरूरी बातें
गट हेल्थ एक बड़ा न्यूट्रिशन प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है, लेकिन यह शायद लो-शुगर (Low-Sugar) या डायबिटीज-फ्रेंडली फूड्स जैसे दूसरे ट्रेंड्स की जगह लेने के बजाय, एक व्यापक हेल्थ पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रहेगा। अगले 3 से 5 सालों में, गट हेल्थ प्रोडक्ट्स के प्रमुख फूड कैटेगरी में लगभग 1% से 2% का छोटा लेकिन बढ़ता हुआ हिस्सा होने का अनुमान है। निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये ब्रांड्स ग्राहकों को बार-बार खरीदारी के लिए कितना प्रभावी ढंग से शिक्षित कर पाते हैं, बड़े FMCG प्लेयर्स से क्या कॉम्पिटिटिव रिस्पांस (Competitive Response) आता है, और क्या ये नए लॉन्च सस्टेनेबल प्रॉफिट मार्जिन (Sustainable Profit Margins) हासिल कर पाते हैं, क्योंकि यह कैटेगरी एक खास रुचि से निकलकर एक मेनस्ट्रीम जरूरत बनने की ओर बढ़ रही है।
