NielsenIQ की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में **82%** उपभोक्ता अब सोशल मीडिया के आधार पर ही अपने ड्रिंक्स चुन रहे हैं। यह बदलाव बेवरेज कंपनियों के लिए डिजिटल मार्केटिंग का खर्च बढ़ा रहा है, जिससे मार्जिन पर दबाव और कॉम्पिटिशन बढ़ने का बड़ा रिस्क पैदा हो गया है।
NielsenIQ की हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों की ड्रिंक चुनने की आदतें पूरी तरह बदल गई हैं। अब 82% ग्राहक ऑनलाइन कंटेंट देखकर वेन्यू तय करते हैं, जबकि 66% लोग सिर्फ सोशल प्लेटफॉर्म पर देखकर नया ब्रांड ट्राई करते हैं। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव है, क्योंकि अब कंपनियों को मार्केट में प्रासंगिक बने रहने के लिए अपना कैपिटल और मेहनत डिजिटल स्पेस में झोंकनी पड़ रही है।\n\n### बढ़ती चुनौती और बढ़ता कॉम्पिटिशन\n\nपुराने समय की तरह अब ब्रांड्स केवल एक कैटेगरी में नहीं लड़ रहे हैं। अब एक सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी का मुकाबला सिर्फ दूसरी सोडा कंपनी से नहीं, बल्कि एनर्जी ड्रिंक्स, कॉकटेल और बियर से भी है। ग्राहक अब अलग-अलग 5 तरह की कैटेगरीज में घूम रहे हैं, जिससे मार्केट शेयर बचाना मुश्किल हो गया है।\n\n### मार्जिन पर दबाव का रिस्क\n\nडिजिटल विजिबिलिटी के लिए लगातार भारी खर्च करना और साथ में कच्चे माल (Raw material) की बढ़ती कीमतें कंपनियों के मुनाफे को निचोड़ रही हैं। Varun Beverages जैसी दिग्गज कंपनियों ने हाल ही में मजबूत सेल्स ग्रोथ दिखाई है, लेकिन इनपुट कॉस्ट की महंगाई इस कमाई को बेअसर कर सकती है। अब निवेशकों को सिर्फ रेवेन्यू ग्रोथ ही नहीं, बल्कि 'मार्जिन सस्टेनेबिलिटी' पर भी बारीकी से नजर रखनी होगी।\n\n### निवेश का भविष्य\n\nनिवेशकों के लिए चुनौती यह है कि सोशल मीडिया कैंपेन का रिटर्न (ROI) मापना मुश्किल है। अगर कंपनियां बिना सेल्स ग्रोथ के सिर्फ विज्ञापन पर पैसा खर्च करती रहीं, तो ब्रांड वैल्यू कमजोर हो सकती है। हालांकि, अभी भी 41% उपभोक्ता क्वालिटी और वैल्यू को प्राथमिकता देते हैं। आने वाले नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर गौर करना जरूरी होगा कि वे डिजिटल खर्च और मार्जिन को कैसे बैलेंस करते हैं।
