भारत के शराब उद्योग में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जून **2026** तिमाही में बीयर की वॉल्यूम में **17%** की बढ़त हुई है, जबकि स्पिरिट्स (Spirits) की ग्रोथ महज **2%** रही। राज्यों द्वारा शराब पर टैक्स बढ़ाने के चलते आम ग्राहक अब बीयर की ओर रुख कर रहे हैं।
राज्यों की टैक्स नीति का बड़ा असर
इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह अलग-अलग राज्यों की एक्साइज (Excise) पॉलिसी है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े बाजारों ने IMFL पर टैक्स में भारी बढ़ोतरी की है, जबकि बीयर पर ड्यूटी को स्थिर रखा गया है या कहीं-कहीं घटाया गया है। इसका सीधा असर मास-मार्केट व्हिस्की सेगमेंट पर पड़ा है, जो स्पिरिट्स मार्केट का करीब दो-तिहाई हिस्सा है। इस सेगमेंट की वॉल्यूम में 1% की गिरावट दर्ज की गई है।
कर्नाटक का नया मॉडल
कर्नाटक इस बदलाव का केंद्र बना हुआ है, जहां 2026 में अल्कोहल-कंटेंट के आधार पर नई एक्साइज ड्यूटी लागू की गई। इसने बीयर की बिक्री को बूस्ट देने का काम किया है। स्पिरिट्स कंपनियों के लिए दोहरी चुनौती है—एक तरफ मांग कमजोर है और दूसरी तरफ वे बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की स्थिति में नहीं हैं।
ऑपरेशनल रिस्क और आउटलुक
शराब उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह 'स्टेट सब्जेक्ट' (State Subject) है, जिससे कंपनियों को हर राज्य के अलग-अलग नियम झेलने पड़ते हैं। टैक्स बढ़ने पर कंपनियां मार्जिन बचाने में विफल हो रही हैं। इसके अलावा, GST इनपुट क्रेडिट की सीमाएं भी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रही हैं। सावन के महीने में मांग में गिरावट के बाद, अब निवेशकों की नजर फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही पर टिकी है कि क्या बीयर की यह रफ्तार बरकरार रह पाएगी या नहीं।
