भारत के रूम एयर कंडीशनर (RAC) मार्केट में FY2027 के दौरान जोरदार रिकवरी देखी जा रही है। कंपनियां अब अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।
बाजार की रफ्तार में उछाल
बीता फाइनेंशियल ईयर (FY2026) एसी सेक्टर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा था, जिसमें डिमांड कम होने और खराब मौसम की वजह से वॉल्यूम में 10% से 15% तक की गिरावट आई थी। हालांकि, FY2027 की पहली तिमाही में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है, जहां वॉल्यूम में सालाना आधार पर 15% की ग्रोथ दर्ज की गई है। जानकारों का अनुमान है कि पूरे फाइनेंशियल ईयर में यह ग्रोथ 12% से 14% के दायरे में रह सकती है, जिसकी मुख्य वजह लगातार बढ़ती गर्मी और घरों में एसी की कम पैठ है।
'मेक इन इंडिया' पर दांव
ग्रोथ को बनाए रखने के लिए दिग्गज कंपनियां अब भारत में ही कल-पुर्जों के निर्माण पर फोकस कर रही हैं। Voltas जैसी कंपनी ने पहली तिमाही में ही 10 लाख से ज्यादा यूनिट्स बेचकर एक रिकॉर्ड बनाया है। इंडस्ट्री का लक्ष्य है कि FY2028 तक स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को मौजूदा 60-65% से बढ़ाकर 70-75% तक ले जाया जाए। इससे इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी और ग्लोबल कमोडिटी कीमतों व करेंसी फ्लक्चुएशन से मार्जिन को सुरक्षा मिलेगी।
मार्जिन और कॉस्ट का गणित
डिमांड के बावजूद कंपनियां लागत के दबाव से जूझ रही हैं। एनर्जी एफिशिएंसी नियमों और कच्चे माल की महंगाई के चलते कुल लागत में 10% से 13% का इजाफा हुआ है। हालांकि, सितंबर 2025 में 2 टन से कम के एसी पर GST को 28% से घटाकर 18% किए जाने से ग्राहकों को कुछ राहत जरूर मिली है।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंपनियां क्या बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी? यदि महंगाई या ब्याज दरों में बदलाव होता है, तो कंज्यूमर स्पेंडिंग पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, मार्केट की नजर इस बात पर है कि कंपनियां डिमांड के साथ-साथ अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे सुरक्षित रखती हैं।
