भारत और यूके के बीच ट्रेड डील के तहत ब्रिटिश व्हिस्की पर इंपोर्ट टैरिफ को **150%** से घटाकर **75%** कर दिया गया है। इससे महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में Johnnie Walker जैसे प्रीमियम ब्रांड्स सस्ते हो गए हैं, हालांकि स्टेट लेवल के टैक्स के कारण कीमतों में गिरावट सीमित रहेगी।
भारत और यूके के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के 15 जुलाई 2026 से लागू होते ही प्रीमियम शराब के बाजार में हलचल मच गई है। इंपोर्ट ड्यूटी में इस भारी कटौती का सीधा असर ग्लोबल दिग्गज कंपनियों जैसे Diageo और Pernod Ricard पर पड़ा है, जो अब अपनी प्राइजिंग स्ट्रेटेजी में बदलाव कर रही हैं।
रिटेल कीमतों में बदलाव
महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में विदेशी ब्रांड्स अब आम लोगों की पहुंच में आ रहे हैं। Diageo के Johnnie Walker Black Label की कीमत पहले के ₹4,250 से घटकर लगभग ₹3,800 हो गई है। वहीं, J&B व्हिस्की की कीमत ₹2,300 से गिरकर ₹1,700 के आसपास आ गई है। Pernod Ricard भी अपने पोर्टफोलियो जैसे Chivas, Ballantine's और The Glenlivet की कीमतों को लेकर स्थानीय अधिकारियों के साथ चर्चा कर रही है।
कीमतें 75% क्यों नहीं गिरीं?
निवेशकों को यह समझना होगा कि सेंट्रल ड्यूटी कट का मतलब यह नहीं है कि रिटेल कीमत भी उतनी ही कम हो जाएगी। भारत में शराब की अंतिम कीमत राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए एक्साइज ड्यूटी, स्थानीय टैक्स और डिस्ट्रीब्यूशन मार्जिन पर निर्भर करती है। राज्य सरकारें अपने हिसाब से इन लेवी को बदल सकती हैं, जिससे इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती का फायदा पूरी तरह ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाता।
घरेलू ब्रांड्स पर दबाव
इस बदलाव से घरेलू प्रीमियम सिंगल माल्ट बनाने वाली कंपनियों के लिए मुकाबला कड़ा हो गया है। Amrut, Paul John और Rampur जैसे ब्रांड्स, जो प्रीमियम सेगमेंट में अपनी जगह बना चुके थे, अब उन्हें इम्पोर्टेड स्कॉच से कड़ी टक्कर मिल रही है। कीमतों का अंतर कम होने से इन कंपनियों को मार्केट शेयर बचाने के लिए मार्केटिंग और प्राइजिंग में नए दांव चलने पड़ेंगे।
आगे क्या होगा?
आने वाले त्योहारी सीजन में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सस्ती कीमतों से बिक्री में कोई बड़ा उछाल आता है। साथ ही, अगले 10 सालों में टैरिफ को घटाकर 40% तक लाने की योजना है, जिससे इस सेक्टर में लंबी अवधि तक कॉम्पिटिटिव डायनामिक्स बदलते रहेंगे।
