खिलौना बाज़ार में भारत का बड़ा दांव: 2032 तक **5%** ग्लोबल शेयर का लक्ष्य!

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AuthorNeha Patil|Published at:
खिलौना बाज़ार में भारत का बड़ा दांव: 2032 तक **5%** ग्लोबल शेयर का लक्ष्य!

भारत ने दुनिया के **$71 अरब** के खिलौना बाज़ार में 2032 तक **5%** हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल, देश की हिस्सेदारी **1%** से भी कम है। सरकार की योजना अमेरिका और यूके जैसे देशों में एक्सपोर्ट बढ़ाने पर है, खासकर AI-बेस्ड और स्मार्ट लर्निंग वाले खिलौनों पर फोकस रहेगा।

जानिए क्या है भारत की नई योजना?

भारतीय सरकार ने देश के खिलौना उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। इसका मकसद 2032 तक ग्लोबल टॉय मार्केट में 5% की बड़ी हिस्सेदारी हासिल करना है। आपको बता दें कि फिलहाल भारत की ग्लोबल टॉय ट्रेड में हिस्सेदारी 1% से भी काफी कम है। इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड प्रमोशन डिपार्टमेंट (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) ने इस लक्ष्य को पाने के लिए अमेरिका, यूके, पोलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे दस देशों को टारगेट किया है।

सिर्फ ट्रेडिशनल नहीं, अब हाई-टेक खिलौनों पर जोर!

इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए, सरकार पारंपरिक खिलौनों से आगे बढ़कर मॉडर्न और हाई-वैल्यू सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय निर्माताओं को स्मार्ट लर्निंग प्रोडक्ट्स, AI-पावर्ड टॉयज़ और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) वाले खिलौने बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा, भारतीय संस्कृति और नायकों पर आधारित खिलौने बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में एक खास जगह बनाई जा सके। कनेक्टेड टॉयज़ और वीडियो गेम कंसोल जैसे सेगमेंट्स में भी मौके तलाशे जा रहे हैं ताकि बदलते ग्लोबल ट्रेंड्स के साथ तालमेल बिठाया जा सके।

एक्सपोर्ट में जबरदस्त उछाल, इंपोर्ट में गिरावट

यह पहल पिछले कुछ सालों में खिलौना सेक्टर में आए बड़े बदलावों को दर्शाती है। फाइनेंशियल ईयर 2019 से 2026 के बीच, घरेलू खिलौनों के इंपोर्ट में 37.5% की भारी गिरावट आई है, वहीं एक्सपोर्ट में 89.1% का ज़बरदस्त उछाल देखा गया है। यह दिखाता है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग अब ज़्यादा कॉम्पिटिटिव हो रही है और इंपोर्ट पर हमारी निर्भरता कम हुई है। अब निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या भारतीय कंपनियां बेसिक मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर हाई-टेक और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की ओर सफलतापूर्वक बढ़ पाती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों के लिए जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को बनाए रख पाती हैं।

आगे की राह में चुनौतियाँ

हालांकि एक्सपोर्ट ग्रोथ का ट्रेंड पॉजिटिव है, लेकिन ग्लोबल डिमांड को लगातार पूरा करने के लिए प्रोडक्शन स्केल को बढ़ाना इंडस्ट्री के सामने एक बड़ी चुनौती है। इन अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय निर्माता कच्चे माल की लागत को कैसे मैनेज करते हैं, विभिन्न देशों के सेफ्टी रेगुलेशंस को कैसे पार करते हैं, और उन स्थापित ग्लोबल प्लेयर्स से कैसे मुकाबला करते हैं जिनकी बाज़ार में पहले से ही मजबूत पकड़ है। आने वाले समय में, सभी की निगाहें टारगेट देशों में एक्सपोर्ट की मात्रा और नई टेक्नोलॉजी को अपनाने की रफ़्तार पर टिकी रहेंगी ताकि खिलौना सेक्टर में प्रासंगिक बने रहा जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.