भारत में स्मार्टफोन की ऑनलाइन बिक्री का मार्केट शेयर साल 2026 की पहली छमाही में गिरकर **41.9%** पर आ गया है। मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत के चलते फोन की कीमतें **40%** तक महंगी हो गई हैं, जिसके कारण ग्राहक अब बेहतर EMI और फाइनेंसिंग विकल्पों के लिए ऑफलाइन स्टोर का रुख कर रहे हैं।
ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन का गणित
साल 2026 की पहली छमाही भारतीय स्मार्टफोन बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रही है। साल 2025 की समान अवधि में ऑनलाइन मार्केट शेयर 46.5% था, जो अब घटकर 41.9% रह गया है। यह डेटा साफ बताता है कि पिछले कुछ सालों में जो डिजिटल एडॉप्शन की रफ्तार दिखी थी, वह अब सुस्त पड़ गई है।
कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
स्मार्टफोन की कीमतों में हुई 35% से 40% की भारी बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह AI-एक्सेलरेटेड मेमोरी चिप्स की डिमांड है। DRAM और NAND की बढ़ती लागत ने एंट्री-लेवल सेगमेंट की कमर तोड़ दी है, जो पहले ऑनलाइन सेल्स की रीढ़ हुआ करता था। नतीजा यह रहा कि कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में 7.9% की गिरावट आई, जो पिछले 5 सालों का निचला स्तर है।
रिटेल स्टोर्स का दांव
ऑफलाइन दुकानदार ग्राहकों को लुभाने के लिए बेहतर EMI और आसान फाइनेंसिंग स्कीम्स पेश कर रहे हैं। अनुमान है कि साल 2026 में कुल स्मार्टफोन बिक्री का 42% हिस्सा फाइनेंसिंग के जरिए होगा। लोग अब महंगे फोन खरीदने के लिए ऑनलाइन डिस्काउंट्स के बजाय स्थानीय दुकानों की आसान किस्तों को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।
UPI पर नई रेगुलेटरी टेंशन
रिटेलर्स अब एक नई मुसीबत का सामना कर रहे हैं। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। 'रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' ने इस फैसले का विरोध किया है क्योंकि इससे डिजिटल पेमेंट लेने वाले व्यापारियों की लागत बढ़ जाएगी। अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह बदलाव ग्राहकों की पेमेंट आदतों पर असर डालेगा।
आने वाला फेस्टिव सीजन तय करेगा कि क्या ई-कॉमर्स कंपनियां अपने भारी-भरकम ऑफर्स से इस ट्रेंड को पलट पाएंगी या फिर ऑफलाइन मार्केट का दबदबा बरकरार रहेगा।
