इस फेस्टिव सीजन में स्मार्टफोन बाजार के लिए मिली-जुली खबर है। यूनिट सेल्स में **12%** की कमी आने की उम्मीद है, लेकिन मार्केट वैल्यू **5%** बढ़ सकती है। मेमोरी की बढ़ती लागत और महंगे प्रीमियम फोन की ओर ग्राहकों के शिफ्ट होने से बाजार का गणित बदल गया है।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार इस फेस्टिव सीजन में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां फोन की कुल बिक्री के आंकड़ों में 12% की गिरावट का अनुमान है, वहीं कुल मार्केट वैल्यू 5% बढ़ सकती है। यह विरोधाभास साफ बताता है कि ग्राहक कम फोन खरीद रहे हैं, लेकिन महंगे और प्रीमियम डिवाइसेज की मांग में तेजी है।
क्यों महंगे हुए फोन?
मेमोरी और अन्य जरूरी कंपोनेंट्स की कीमतों में उछाल ने नए स्मार्टफोन की रिटेल कीमतों को काफी बढ़ा दिया है। इस महंगाई के कारण अब आम ग्राहक या तो नए फोन लेने से बच रहे हैं या अपने पुराने हैंडसेट को ही लंबे समय तक चला रहे हैं।
फाइनेंसिंग और ट्रेड-इन का सहारा
बिक्री को बरकरार रखने के लिए कंपनियां अब 'फाइनेंशियल इंजीनियरिंग' का सहारा ले रही हैं। ₹60,000 से लेकर ₹1 लाख तक की रेंज वाले फोन के लिए फाइनेंस प्लान, ट्रेड-इन प्रोग्राम और बायबैक गारंटी महत्वपूर्ण हो गए हैं। Servify जैसी फर्म्स ने देखा है कि अक्टूबर-नवंबर के दौरान एक्सचेंज ऑफर का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है, जो प्रीमियम सेगमेंट को सपोर्ट दे रहा है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में जोश
यह ट्रेंड केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी प्रीमियम फोन की मांग बढ़ी है, जहां फाइनेंसिंग का पेनिट्रेशन कई सेगमेंट में 50% से ऊपर निकल गया है। हालांकि, रिटेलर्स और OEMs के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव जरूर है, क्योंकि प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने से वे पहले जैसे भारी डिस्काउंट देने में असमर्थ हैं। भविष्य में अगर मेमोरी चिप्स की कीमतें कम नहीं हुईं, तो कंपनियों को नए लॉन्च के लिए कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
