फेस्टिव सीजन में स्मार्टफोन मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्राहक अब सस्ते एंट्री-लेवल फोन के बजाय मिड-रेंज और प्रीमियम डिवाइस को प्राथमिकता दे रहे हैं। मार्केट की कुल डिमांड का **93%** हिस्सा अब **₹12,000** से **₹50,000** वाले प्राइस ब्रैकेट में सिमट गया है, जो मोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के प्रॉफिट मार्जिन के लिए बड़ा संकेत है।
भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में इस बार कंज्यूमर्स का मूड बदला हुआ है। फेस्टिव सीजन के दौरान ₹12,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स की डिमांड घटकर अपने प्री-सीजन लेवल का महज 0.72 गुना रह गई है। ऐसा लगता है कि अब ग्राहक कम बजट वाले फोन पर समझौता करने के बजाय थोड़े और पैसे खर्च कर बेहतर स्पेसिफिकेशन्स वाले हैंडसेट्स को चुनना पसंद कर रहे हैं।\n\n### मिड-रेंज और प्रीमियम की आंधी\n\nमार्केट डेटा बताता है कि ₹12,000 से ₹25,000 की रेंज वाले मिड-रेंज स्मार्टफोन्स की डिमांड में दोगुना (2x) उछाल आया है। वहीं, ₹25,000 से ₹50,000 वाला प्रीमियम सेगमेंट और भी तेजी से आगे बढ़ा है, जहां डिमांड 2.13 गुना बढ़ गई है। यह 'प्रीमियमइज़ेशन' (Premiumization) का ट्रेंड भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है।\n\n### कंपनियों के लिए क्या है मायने?\n\nमैन्युफैक्चरर्स के लिए ऊंची कीमत वाले फोन बेचना फायदे का सौदा है, क्योंकि इनसे बेहतर प्रॉफिट मार्जिन मिलता है। हालांकि, मार्केट काफी कंसंट्रेटेड है। चौंकाने वाली बात यह है कि बाजार की कुल डिमांड का आधा हिस्सा सिर्फ 20 मॉडल्स के पास है। इसका मतलब है कि बड़ी ब्रांड्स और मजबूत ब्रांड इक्विटी वाली कंपनियां ही इस बदलाव का फायदा उठा पा रही हैं, जबकि छोटी कंपनियों के लिए मार्केट शेयर बचाना मुश्किल हो रहा है।\n\n### रिस्क और रेपुटेशन मैनेजमेंट\n\nअब मार्केट में सिर्फ 5G या फास्ट चार्जिंग से काम नहीं चल रहा है। ग्राहकों का भरोसा सबसे जरूरी हो गया है। डेटा के मुताबिक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अगर किसी फोन की 1-स्टार रेटिंग में 5 पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो जाए, तो उसकी बिक्री की रफ्तार में 54% तक की गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, कंपनियां डिस्काउंटिंग को लेकर भी एक मुश्किल दौर में हैं, क्योंकि उपभोक्ता साल भर कीमतों पर नजर रखते हैं, जिससे फेक डिस्काउंट्स का असर कम हो गया है।\n\nआने वाले समय में निवेशकों की नजर Samsung, Xiaomi, Vivo और Oppo जैसी दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजों पर होनी चाहिए कि क्या यह प्रीमियम मॉडल्स की बिक्री उनके मुनाफे को सही मायने में बढ़ा पा रही है या नहीं।
