Indian Retail Sector: रिटेल सेक्टर में बंपर निवेश! Q3 में **$1.92 बिलियन** की डील, ज्वेलरी कंपनियों पर दांव

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Retail Sector: रिटेल सेक्टर में बंपर निवेश! Q3 में **$1.92 बिलियन** की डील, ज्वेलरी कंपनियों पर दांव

साल 2026 की तीसरी तिमाही में भारत के कंज्यूमर और रिटेल सेक्टर में हलचल तेज रही। Grant Thornton Bharat के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान **$1.92 बिलियन** की डील एक्टिविटी दर्ज की गई है, जिसमें पब्लिक मार्केट का दबदबा रहा है।

पब्लिक मार्केट का दबदबा

इस तिमाही में फंड जुटाने के तरीके में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कंपनियों ने प्राइवेट इक्विटी के बजाय पब्लिक मार्केट के जरिए पूंजी जुटाने पर जोर दिया। IPO और QIP जैसे इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए 14 ट्रांजेक्शन हुए, जिनमें कुल $975 मिलियन का निवेश आया। यह साफ दिखाता है कि अब स्थापित रिटेल कंपनियां विस्तार के लिए सीधे पब्लिक मार्केट का रास्ता चुन रही हैं।

वहीं, अगर वॉल्यूम की बात करें, तो प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल सेगमेंट का योगदान बना हुआ है। इस सेगमेंट में 84 डील्स हुई हैं, जिनका कुल मूल्य $719 मिलियन रहा, जो कि कुल डील वॉल्यूम का 74% हिस्सा है।

ज्वेलरी सेगमेंट में कंसोलिडेशन

इस दौरान घरेलू स्तर पर बड़ी कंपनियों का छोटी कंपनियों को खरीदने का ट्रेंड (कंसोलिडेशन) काफी तेज रहा। खासकर टेक्सटाइल, अपैरल और ज्वेलरी सेक्टर में काफी हलचल दिखी। एक प्रमुख सौदे में GRT Jewellers ने Tribhovandas Bhimji Zaveri Ltd में 74% हिस्सेदारी $109 मिलियन में खरीदी है। यह अधिग्रहण बताता है कि बड़ी कंपनियां अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आक्रामक रुख अपना रही हैं।

प्रॉफिटेबिलिटी पर निवेशकों का फोकस

निवेशकों की रणनीति अब पूरी तरह से बदल गई है। वे अब उन कंपनियों पर पैसा लगा रहे हैं जो मुनाफे के साथ स्केल करने की क्षमता रखती हैं। अब 'स्पेकुलेटिव' या जोखिम भरे बिजनेस मॉडल्स के दिन लद गए हैं। प्रीमियम सेगमेंट और बेहतर फाइनेंशियल डिसिप्लिन वाली कंपनियों को ही अब रणनीतिक खरीदार और ग्रोथ-स्टेज कैपिटल मिल रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.