भारत में नए स्मार्टफोन की बिक्री में **13%** की गिरावट आई है, लेकिन इसके विपरीत रिफर्बिश्ड (पुराने) स्मार्टफोन मार्केट ने **16%** की ग्रोथ दर्ज की है। डिमांड अब प्रीमियम डिवाइसेज और टियर-3 शहरों की ओर शिफ्ट हो रही है।
स्मार्टफोन मार्केट में एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर नए फोन की बिक्री में 13% की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं रिफर्बिश्ड यानी सेकंड-हैंड स्मार्टफोन का बाजार 16% की बढ़त के साथ चमक रहा है। यह साफ दिखाता है कि भारतीय ग्राहक अब महंगे नए फोन खरीदने के बजाय किफायती दाम में प्रीमियम अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्रीमियम सेगमेंट में दिखा दम
मार्केट का गणित पूरी तरह बदल गया है। उम्मीद थी कि मिड-रेंज फोन्स की डिमांड बढ़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके उलट, ₹50,000 से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन्स में सबसे ज्यादा हलचल देखी गई। ग्राहक अब कम बजट में हाई-एंड क्वालिटी की तलाश कर रहे हैं।
Cashify के डेटा के मुताबिक, एवरेज ट्रेड-इन वैल्यू ₹15,105 तक पहुंच गई है, जो सालाना आधार पर 40% का उछाल है। ब्रांड्स की बात करें तो Motorola और Google ने अपग्रेड एक्टिविटी में क्रमशः 79% और 74% की तेजी दिखाई है, जबकि Samsung अभी भी वॉल्यूम के मामले में मार्केट लीडर बना हुआ है।
टियर-3 शहरों में बढ़ती पैठ
बड़ी मेट्रो सिटीज के मुकाबले टियर-3 शहरों ने बाजी मार ली है। इन क्षेत्रों में रिफर्बिश्ड मार्केट 49% की रफ्तार से बढ़ा है, जबकि बड़े शहरों में यह 39% रहा। यह इस बात का संकेत है कि संगठित (Organized) प्लेयर अब छोटे शहरों के उस मार्केट में घुस रहे हैं जो पहले केवल असंगठित व्यापारियों तक सीमित था।
इन्वेस्टर्स के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि कंपनियां अपनी इन्वेंट्री कैसे मैनेज करती हैं। नए फोन की बिक्री सुस्त होने से पुरानी इन्वेंट्री की सप्लाई पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए, कंपनियों का फोकस अब वॉल्यूम के बजाय प्रीमियम और महंगे स्टॉक को मैनेज करने पर है ताकि मार्जिन बना रहे।
