भारत का रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन मार्केट साल 2026 में **16%** की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। नए फोन की बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक अब पुराने प्रीमियम हैंडसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर टियर-3 शहरों में दिख रहा है।
स्मार्टफोन मार्केट में यह बदलाव इसलिए आ रहा है क्योंकि फ्लैगशिप मॉडल्स की कीमतें आम बजट से बाहर हो गई हैं। ग्राहक अब कम कीमत में प्रीमियम टेक्नोलॉजी पाने के लिए सर्टिफाइड रिफर्बिश्ड डिवाइसेस को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
संगठित क्षेत्र (Organized Players) का दबदबा
ControlZ जैसी कंपनियों ने हालिया फेस्टिव सीजन के दौरान 100% सेल्स ग्रोथ दर्ज की है। खरीदार अब नए बजट फोन के बजाय पुराने जनरेशन के iPhone (जैसे 13, 14, 15 सीरीज) को तरजीह दे रहे हैं। मार्केट की परिपक्वता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि औसत ट्रेड-इन वैल्यू बढ़कर ₹15,105 हो गई है।
टियर-3 शहरों में तेजी
अब यह क्रेज सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, छोटे शहरों (टियर-3) में ट्रेड-इन एक्टिविटी 49% की दर से बढ़ी है, जबकि मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 39% रहा। Samsung अभी भी ट्रेड-इन वॉल्यूम में सबसे आगे है, लेकिन Motorola और Google के डिवाइसेस की डिमांड में भी तेजी देखी जा रही है।
सामने हैं कई चुनौतियां
तेज ग्रोथ के बावजूद, सेक्टर को अनऑर्गेनाइज्ड मार्केट से कड़ी टक्कर मिल रही है, जो वारंटी और क्वालिटी के मामले में पीछे होने के बावजूद कम कीमत पर माल बेचते हैं। साथ ही, नए स्मार्टफोन मार्केट में कंपोनेंट शॉर्टेज होने पर रिफर्बिश्ड मार्केट की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, रुपए की गिरती वैल्यू और ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव भी कंज्यूमर सेंटीमेंट पर दबाव डाल सकते हैं।
