भारत में हाई-प्रोटीन प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे नई पार्टनरशिप और निवेश में उछाल आया है। प्रोटीन मार्केट के **₹15,300 करोड़** से बढ़कर **₹21,000 करोड़** तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में Whey प्रोटीन के दाम **4 गुना** होने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है।
भारत के कंज्यूमर सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। अब प्रोटीन सिर्फ जिम या फिटनेस स्टोर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम कैफे और घरों की रसोई तक पहुंच गया है। IMARC के अनुमानों के मुताबिक, यह मार्केट 2025 में ₹15,300 करोड़ से बढ़कर 2031 तक ₹21,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।
कैफे और ब्रांड्स का दांव
बड़े कैफे चेन इस बदलाव को भुनाने में लगे हैं। Chaayos ने Wholsum Foods के साथ मिलकर प्रोटीन टी लॉन्च की है, तो Tim Hortons India ने Amul के साथ पार्टनरशिप कर प्रोटीन कॉफी पेश की है। वहीं, Tata Starbucks ने SuperYou के साथ मिलकर प्रोटीन कोल्ड फोम को अपने मेन्यू में शामिल किया है।
बढ़ता निवेश और डील एक्टिविटी
कंपनियां इस सेक्टर में भारी पूंजी लगा रही हैं। Milky Mist Dairy Food ने ग्रीक योगर्ट और स्काईर (Skyr) बनाने के लिए ₹40 करोड़ का प्लांट लगाया है। स्टार्टअप जगत में भी हलचल है, जहां Arboreal Bioinnovations ने ₹230 करोड़ और Provilac ने $14 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। इसके अलावा, USV ने Wellbeing Nutrition में 79% हिस्सेदारी ₹1,583 करोड़ में खरीदी है। Hindustan Unilever और Marico जैसी बड़ी कंपनियां भी लगातार इस सेक्टर में अधिग्रहण कर रही हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
सबसे बड़ी चुनौती रॉ मटीरियल की महंगाई है। दुनिया भर में सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण Whey प्रोटीन के दाम 4 गुना बढ़ गए हैं। इससे कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। यदि ये कंपनियां बढ़ती लागत को ग्राहकों पर डालेंगी, तो क्या डिमांड बरकरार रहेगी? निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे बचाती हैं और क्या वे बढ़ती लागत के बावजूद मार्केट शेयर कायम रख पाती हैं।
