कैंसलेशन फीस पर सरकार की पैनी नज़र
ऑनलाइन टिकट बुकिंग सर्विस देने वाली कंपनियों पर अब सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। आरोप है कि ये प्लेटफॉर्म्स टिकट कैंसल करवाने के नाम पर ग्राहकों से बहुत ज़्यादा फीस ले रहे हैं। डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) को इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। CCPA यह पता लगाएगी कि क्या ये प्लेटफॉर्म्स एयरलाइन्स द्वारा ली जाने वाली फीस से ज़्यादा फीस वसूल रहे हैं, या फिर बुकिंग के समय ही इन फीस के बारे में ठीक से नहीं बता रहे। इस जांच का मकसद पारदर्शिता लाना और ग्राहकों को गलत व्यापारिक तरीकों से बचाना है।
छुपे हुए चार्जेज़ की होगी जांच
यह जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि क्या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स टिकट कैंसल करने पर एयरलाइन्स की फीस से ज़्यादा कटौती कर रहे हैं, या फिर बुकिंग के समय इन छुपे हुए चार्जेज़ के बारे में ग्राहकों को साफ तौर पर नहीं बताया जा रहा। अगर ये तरीके गलत पाए गए, तो यह कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 का उल्लंघन माना जाएगा।
CCPA लेगी एक्शन
कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्टर प्रह्लाद जोशी ने संकेत दिया है कि CCPA ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए "आवश्यक कार्रवाई करेगी, जिसमें उचित होने पर सामूहिक कार्रवाई (class action) भी शामिल है।" यह बयान ऑनलाइन ट्रैवल मार्केट में गलत कीमत बताने और रिफंड नीतियों के खिलाफ एक सख्त रुख का संकेत देता है।
इस जांच की शुरुआत बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा की शिकायत के बाद हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि ट्रैवल बुकिंग साइट Agoda ने एक टिकट कैंसल करने के लिए एयरलाइन की तुलना में काफी ज़्यादा फीस ली थी। यह मामला ऑनलाइन छुपे हुए खर्चों और रिफंड प्रक्रियाओं की अस्पष्टता को लेकर बढ़ती उपभोक्ता चिंताओं को उजागर करता है।
