BIS सर्टिफिकेशन: 1 अक्टूबर से 90 इलेक्ट्रिकल सामानों के लिए भारत में हुआ अनिवार्य

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AuthorMehul Desai|Published at:
BIS सर्टिफिकेशन: 1 अक्टूबर से 90 इलेक्ट्रिकल सामानों के लिए भारत में हुआ अनिवार्य

1 अक्टूबर 2026 से भारत में 90 तरह के इलेक्ट्रिकल एप्लायंसेज (Electrical Appliances) के लिए BIS सर्टिफिकेशन (Certification) अनिवार्य हो गया है। अब से इन सामानों को देश में बेचने के लिए ISI मार्क होना जरूरी है।

क्या है नया नियम?

यह नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा, जिसके तहत 90 कैटेगरी के इलेक्ट्रिकल एप्लायंसेज के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) का सर्टिफिकेशन लेना मैन्युफैक्चरर्स (Manufacturers), इम्पोर्टर्स (Importers) और सेलर्स (Sellers) के लिए कंपलसरी (Compulsory) होगा। इसका मतलब है कि अब से ये सभी सामान देश में कानूनी तौर पर तभी बन, स्टोर या बेचे जा सकेंगे जब उन पर ISI मार्क लगा होगा। इस कदम से भारतीय बाजार में प्रोडक्ट की क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स (Safety Standards) को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और घटिया क्वालिटी के प्रोडक्ट्स की एंट्री रुकेगी।

किन प्रोडक्ट्स पर होगा असर?

इस नियम के दायरे में फूड प्रोसेसर, ओवन, इलेक्ट्रिक टूथब्रश, वैक्यूम क्लीनर और पर्सनल ब्यूटी डिवाइसेज (Personal Beauty Devices) जैसे आम घरेलू सामान शामिल हैं। कंपनियों को सर्टिफिकेशन के लिए प्रोडक्ट की टेस्टिंग (Testing) और फैक्ट्री का इंस्पेक्शन (Inspection) कराना होगा। यह पूरी प्रक्रिया में करीब 3 से 6 महीने लग सकते हैं, इसलिए कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे सप्लाई चेन में किसी भी तरह की रुकावट से बचने के लिए जल्द से जल्द आवेदन शुरू कर दें।

कंपनियों के लिए समय-सीमा

इंडस्ट्री को एडजस्ट (Adjust) करने में मदद करने के लिए, सरकार ने कंपनियों के साइज के हिसाब से लागू होने की समय-सीमा तय की है:

  • बड़ी और मध्यम आकार की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां, साथ ही भारत में सामान इंपोर्ट (Import) करने वाली सभी कंपनियों को 1 अक्टूबर 2026 तक सर्टिफाइड होना होगा।
  • छोटी कंपनियों (Small Enterprises) के लिए यह डेडलाइन 1 जनवरी 2027 है।
  • माइक्रो-एंटरप्राइजेज (Micro-enterprises) को 1 अप्रैल 2027 तक जरूरी लाइसेंस हासिल करने होंगे।

बिजनेस पर क्या होगा असर और क्या हैं खतरे?

जो कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। BIS एक्ट 2016 के तहत, नॉन-कंप्लायंट (Non-compliant) कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री पर रोक लग सकती है, कस्टम्स (Customs) पर माल जब्त हो सकता है और प्रोडक्ट वापस मंगाने (Recall) पड़ सकते हैं। इसके अलावा, बिना सर्टिफिकेशन वाले प्रोडक्ट्स को बेचने पर पेनल्टी (Penalty) भी लगाई जा सकती है।

उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और एप्लायंस सेक्टर (Consumer Electronics and Appliance Sector) में इन्वेस्टर्स (Investors) के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या डोमेस्टिक (Domestic) कंपनियां बिना प्रोडक्शन कैपेसिटी (Production Capacity) में कमी या ज्यादा कंप्लायंस कॉस्ट (Compliance Costs) के सर्टिफिकेशन प्रोसेस को पूरा कर पाती हैं।

हालांकि, इस नियम से बिजनेस करने की लागत बढ़ेगी, लेकिन यह उन स्थापित कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स (Regulatory Requirements) को तेजी से पूरा कर लेती हैं। छोटे और अनऑर्गनाइज्ड (Unorganized) प्लेयर जो इन क्वालिटी बेंचमार्क्स (Quality Benchmarks) को पूरा नहीं कर पाते, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे बड़ी कंपनियों को मार्केट शेयर (Market Share) बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इन्वेस्टर्स को कंपनियों के BIS एप्लीकेशन्स (Applications) की स्थिति और टेस्टिंग व प्रोडक्शन फैसिलिटीज (Production Facilities) को अपग्रेड करने पर पड़ने वाले असर पर नजर रखनी चाहिए।

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