बाज़ार में आई दो फाड़ की स्थिति
4 फरवरी, 2026 को भारतीय बाज़ारों ने नरमी के साथ शुरुआत की। यह उस दिन की तुलना में बिल्कुल विपरीत था जब भारत-अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (trade agreement) के कारण बाज़ारों में ज़ोरदार उछाल देखा गया था। इस समझौते ने जहाँ आर्थिक संभावनाओं को बेहतर बनाया है और निर्यात से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया है, वहीं वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर में जारी कमजोरी, खासकर AI के विकास से IT उद्योग पर पड़ रहे असर ने घरेलू सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। इस तरह बाज़ार में एक मिश्रित तस्वीर दिख रही है, जहाँ एक ओर मैक्रो-इकोनॉमिक (macro-economic) संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी ओर सेक्टर-विशिष्ट (sector-specific) चुनौतियाँ बढ़ रही हैं।
ट्रेड डील का असर: निर्यात चमक, GDP अनुमानों में उछाल
2 फरवरी, 2026 को घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अमेरिकी टैरिफ (tariffs) को भारतीय सामानों पर 50% तक से घटाकर 18% कर दिया गया है। इस बड़े कदम से भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमानों में बढ़ोतरी हुई है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.9% कर दिया है, वहीं ग्लोबलडेटा (GlobalData) ने FY2025-26 के लिए 7.5% का अनुमान जताया है। इस समझौते का सीधा फायदा टेक्सटाइल, लेदर, रत्न और समुद्री खाद्य निर्यात जैसे क्षेत्रों को मिल रहा है, जिनकी निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता (export competitiveness) बढ़ी है। समझौते के बाद भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है।
AI के डर से IT सेक्टर पर दबाव, Infosys का शेयर गिरा
हालांकि, IT सेक्टर एक अलग तरह के दबाव का सामना कर रहा है। AI डेवलपर्स द्वारा पेश की जा रही नई पेशकशों से AI-आधारित व्यवधान (AI-led disruption) के डर ने अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली को हवा दी है। इसका सीधा असर भारतीय IT कंपनियों पर पड़ा है, जहाँ Infosys के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs) में रात भर में 5.5% से अधिक की गिरावट आई। 4 फरवरी को Infosys के शेयर इंट्राडे में ₹1,552.9 के निचले स्तर पर पहुंच गए, जो 6.17% की गिरावट दर्शाता है। यह व्यापक बाज़ार और IT सेक्टर के औसत से भी खराब प्रदर्शन है। कुछ विश्लेषकों ने पहले IT सेवाओं के लिए मजबूत मांग के चलते Infosys के टारगेट प्राइस बढ़ाए थे, लेकिन AI से जुड़ी वर्तमान चिंताएँ सेक्टर के वैल्यूएशन (valuation) के लिए एक नया जोखिम पेश करती हैं। 4 फरवरी, 2026 तक Infosys का P/E रेश्यो 24.0 और EPS 68.99 था।
बाज़ार का वैल्यूएशन और निवेशकों का सेंटीमेंट
मौजूदा समय में निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) दोनों ही ऊँचे वैल्यूएशन मल्टीपल्स (valuation multiples) पर कारोबार कर रहे हैं। निफ्टी का P/E रेश्यो लगभग 22.4 है, जबकि कुछ अनुमान इसे 21.76-21.8 के आसपास बताते हैं। यह ऐतिहासिक औसत और उभरते बाज़ार (emerging market) के साथियों की तुलना में काफी ज़्यादा है, जहाँ MSCI इमर्जिंग मार्केट का औसत P/E 12-14x है। भारत का फॉरवर्ड P/E रेश्यो 23.3 है, जो प्रमुख बाज़ारों में सबसे ज़्यादा है। इन ऊँचे वैल्यूएशन के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 3 फरवरी, 2026 को ₹5,236 करोड़ का शुद्ध निवेश (net inflow) करके अपना विश्वास दिखाया, जो हालिया बिकवाली के विपरीत था। यह दर्शाता है कि भले ही ट्रेड डील जैसे मैक्रो फैक्टर्स सकारात्मक हों, लेकिन ऊँचे वैल्यूएशन और सेक्टर-विशिष्ट IT चुनौतियों को देखते हुए बाज़ार में सतर्कता बरतना ज़रूरी है।
आगे क्या? टेक्निकल आउटलुक और RBI की पॉलिसी
पिछले दिन की ज़ोरदार तेज़ी के बाद, 4 फरवरी को बाज़ार में कुछ मुनाफावसूली (profit-booking) देखने को मिली। निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट स्तर 25,600 के आसपास है, जबकि 25,840 पर रेजिस्टेंस (resistance) है। इस स्तर से ऊपर बढ़ने पर 25,923-26,020 के लक्ष्य देखे जा सकते हैं। 6 फरवरी को होने वाली भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक से ब्याज दरों में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है और इसका रुख नरमी (dovish stance) भरा रहने की संभावना है, जिससे बाज़ार को कोई तत्काल बड़ा सहारा नहीं मिलेगा, लेकिन स्थिरता बनी रहेगी।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की दिशा
भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर व्यापार संभावनाओं के कारण 2026 के लिए संशोधित अनुमानों के साथ मजबूत विकास पथ पर है। हालांकि, वैश्विक साथियों की तुलना में भारतीय बाज़ार का वैल्यूएशन अभी भी महंगा है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय बाज़ार अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी साइकल्स के प्रति लचीला रहा है, लेकिन 2025 की बाज़ार गिरावट जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं ने बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया है। वर्तमान AI क्रांति IT सेक्टर के लिए एक संभावित संरचनात्मक बदलाव प्रस्तुत करती है, जिसके लिए विकास अनुमानों और वैल्यूएशन का सावधानीपूर्वक आकलन करना आवश्यक होगा, भले ही पारंपरिक निर्यात चालक ट्रेड डील से लाभान्वित हो रहे हों। भारत AI विनियमन (AI regulation) के मामले में सावधानी से आगे बढ़ रहा है, नवाचार और जोखिम को संतुलित करने के लिए मौजूदा फ्रेमवर्क पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।