भारत का आइसक्रीम बाजार तेजी से बदल रहा है। ग्राहक अब वेजिटेबल-फैट फ्रोजन डेजर्ट्स के बजाय डेयरी-आधारित प्रोडक्ट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। 2025 में हुए GST कट और Reliance Consumer Products की एंट्री ने इस सेक्टर में कॉम्पिटिशन को और तेज कर दिया है।
भारतीय आइसक्रीम इंडस्ट्री एक बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव के दौर से गुजर रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कंज्यूमर्स का रुझान डेयरी-आधारित आइसक्रीम की तरफ तेजी से बढ़ा है, जो मौजूदा फिस्कल ईयर में 45% वॉल्यूम शेयर पर पहुंच गया है, जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा महज 35% था। इसके उलट, वेजिटेबल-फैट आधारित फ्रोजन डेजर्ट्स, जो कभी बजट सेगमेंट पर राज करते थे, अब सिमटकर 55% रह गए हैं।
GST कटौती और बदलती डिमांड
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर सरकारी नीति रही है। सितंबर 2025 से आइसक्रीम पर GST को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इस टैक्स कटौती ने कीमतों को किफायती बनाया है, जिससे आइसक्रीम अब केवल गर्मियों का शौक नहीं, बल्कि साल भर बिकने वाला प्रोडक्ट बन गया है। बेहतर कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते अब पीक सेल्स का समय भी 90 दिनों से बढ़कर 120 दिनों का हो गया है।
नई चुनौती और कॉम्पिटिशन
Reliance Consumer Products ने सितंबर 2026 में अपना ब्रांड 'Bombay Creamery' लॉन्च कर मार्केट में हलचल मचा दी है। ₹10 के आक्रामक प्राइस पॉइंट के साथ, कंपनी हाई-वॉल्यूम सेगमेंट को टारगेट कर रही है। इससे Amul, Kwality Wall's, Vadilal और Hatsun Agro Product जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए सीधी चुनौती पैदा हो गई है।
निवेशकों के लिए रिस्क और फैक्टर्स
बाजार में बढ़ती इस जंग के चलते दिग्गज कंपनियां डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, डीप-फ्रीजर प्लेसमेंट और मार्केटिंग पर अपना खर्च बढ़ा सकती हैं। दूध की बढ़ती प्रोक्योरमेंट कॉस्ट और मार्केटिंग का दबाव कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में इन कंपनियों के मार्जिन और मार्केट शेयर बचाने की रणनीतियों पर पैनी नजर रखनी होगी।
