Ice Cream Industry: भारत में आइसक्रीम का बाजार ₹57,500 करोड़ के पार, Reliance की एंट्री से मची खलबली

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Ice Cream Industry: भारत में आइसक्रीम का बाजार ₹57,500 करोड़ के पार, Reliance की एंट्री से मची खलबली

भारत का आइसक्रीम बाजार साल 2033 तक **₹57,500 करोड़** के आंकड़े को छूने की राह पर है। **11%** की सालाना ग्रोथ के साथ बढ़ रहे इस सेक्टर में Reliance Consumer Products की नई एंट्री ने दिग्गज कंपनियों के लिए चुनौती पेश कर दी है, जिससे प्राइस वॉर का खतरा बढ़ गया है।

भारत के ऑर्गनाइज्ड आइसक्रीम मार्केट में तेजी का नया दौर शुरू हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह इंडस्ट्री 11% की CAGR के साथ ₹57,500 करोड़ के वैल्यूएशन तक पहुंच सकती है। अब आइसक्रीम सिर्फ गर्मियों का उत्पाद नहीं रही, बल्कि साल भर इसकी मांग में इजाफा देखा जा रहा है।

नई प्रतिस्पर्धा और मार्केट स्ट्रैटेजी

मार्केट का गणित तब बदल गया जब 1 सितंबर, 2026 को Reliance Consumer Products ने 'Bombay Creamery' ब्रांड लॉन्च किया। महज ₹10 से प्रोडक्ट्स की शुरुआत कर कंपनी सीधे तौर पर Amul, HUL की Kwality Wall’s और Vadilal जैसे दिग्गजों को टक्कर दे रही है। यह आक्रामक प्राइसिंग रणनीति बाजार में हिस्सेदारी की जंग को और तेज कर सकती है, जिसका सीधा असर पुरानी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने की आशंका है।

प्रीमियम प्रोडक्ट्स और टियर-2 शहरों का दम

बाजार में अब सिर्फ चॉकलेट-वनीला ही नहीं, बल्कि लो-शुगर, हाई-प्रोटीन और आर्टिसनल आइसक्रीम की मांग भी बढ़ी है। महाराष्ट्र वर्तमान में इस बाजार का 15% हिस्सा संभालता है, लेकिन अब जयपुर, अहमदाबाद, चंडीगढ़ और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों से खपत तेजी से बढ़ रही है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए कंपनियां कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स में भारी निवेश कर रही हैं, जिसमें Tetra Pak जैसी कंपनियां भी बुनियादी ढांचा मजबूत करने में जुटी हैं।

जोखिम और निवेशकों के लिए संकेत

ग्रोथ की कहानी तो दमदार है, लेकिन आइसक्रीम का बिजनेस काफी रिस्की भी है। यह एक पेरिसेबल (जल्दी खराब होने वाला) प्रोडक्ट है, जिसके लिए महंगा कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। बढ़ती प्रतियोगिता के चलते प्राइस वॉर छिड़ने का डर है, जिससे कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि दिग्गज खिलाड़ी रिलायंस की कीमतों का मुकाबला कैसे करते हैं और क्या वे बढ़ती लागत के बीच अपने मार्जिन को बरकरार रख पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.