होज़री की कीमतों में **7%** का इजाफा! कच्चे माल की बढ़ती लागत और अनिश्चित मांग बनी वजह

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
होज़री की कीमतों में **7%** का इजाफा! कच्चे माल की बढ़ती लागत और अनिश्चित मांग बनी वजह
Overview

ग्लोबल भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और क्रूड ऑयल (Crude Oil) की बढ़ी कीमतों के चलते भारतीय होज़री इंडस्ट्री की प्रोडक्शन कॉस्ट (Production Cost) में भारी इज़ाफा हुआ है। इसके मद्देनज़र, साउथ इंडिया होज़री मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (SIHMA) बुधवार से इनरवियर (Innerwear), नाइटवियर (Nightwear) और किड्सवियर (Kidswear) जैसे ब्रांडेड कपड़ों की कीमतों में **7%** की बढ़ोतरी करने जा रहा है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

कीमतों में उछाल की वजह

यह 7% की प्राइस हाइक (Price Hike) ऐसे समय में हो रही है जब कॉटन (Cotton) और पॉलिएस्टर (Polyester) जैसे ज़रूरी रॉ मटेरियल (Raw Material) की लागत 15% से लेकर 40% तक चढ़ गई है। कुल प्रोडक्शन खर्च (Production Expenses) भी लगभग 15% बढ़ा है। कॉटन की कीमत 5%, पॉलिएस्टर में 35% का उछाल देखा गया है। साथ ही, डाइंग (Dyeing) और सिलाई धागे (Sewing Thread) में 20% प्रत्येक, इलास्टिक (Elastic) में 25%, बॉक्स (Boxes) में 10% और पॉलीबैग्स (Polybags) में 40% की बढ़ोतरी हुई है। क्रूड ऑयल की कीमतें $100 के पार जाने से पॉलिएस्टर और नायलॉन जैसी चीजों के दाम और बढ़ गए हैं, जो भू-राजनीतिक तनावों का सीधा असर है। जनवरी 2026 में थोक (Wholesale) में कपड़ों की कीमतें 2.08% बढ़ीं, जिसने महंगाई को और हवा दी।

छोटे निर्माताओं पर मार

दक्षिण भारत का तिरुपुर (Tirupur) निटवेअर सेक्टर, जिसकी सालाना वैल्यू करीब ₹30,000 करोड़ है और जो 2,500 प्रोडक्शन यूनिट्स और पांच लाख से ज़्यादा वर्कर्स को रोज़गार देता है, इस वक्त भारी दबाव में है। खासकर छोटी कंपनियां, यानी एमएसएमई (MSMEs), सप्लायर्स की मांग से जूझ रही हैं। पहले जहां सप्लायर्स 35-45 दिन की पेमेंट टर्म्स (Payment Terms) देते थे, वहीं अब तुरंत भुगतान (Immediate Payment) की मांग हो रही है। इससे इन कंपनियों के कैश फ्लो (Cash Flow) पर गंभीर असर पड़ा है और पिछले 10 दिनों में प्रोडक्शन में 25% की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले अप्रैल 2022 में भी टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने प्रोसेसिंग कॉस्ट (Processing Cost) बढ़ने के चलते लगभग 7% का प्राइस हाइक देखा था।

कंज्यूमर स्पेंडिंग: एक मिली-जुली तस्वीर

यह 7% की प्राइस एडजस्टमेंट (Price Adjustment) ऐसे समय में की जा रही है जब कंज्यूमर स्पेंडिंग (Consumer Spending) को लेकर तस्वीर मिली-जुली है। जहां 2026 के लिए भारतीय कंज्यूमर कॉन्फिडेंस (Consumer Confidence) आशावादी दिख रहा है और 60% लोग घरेलू खर्च (Household Spending) बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महंगाई (Inflation) और नौकरी की सुरक्षा (Job Security) को लेकर चिंताएं गैर-ज़रूरी चीज़ों (Non-essentials) पर खर्च घटा रही हैं। जनवरी 2026 के एक सर्वे में सामने आया कि डाइनिंग (Dining), शॉपिंग (Shopping) और एंटरटेनमेंट (Entertainment) पर खर्च करने की योजना 2024 के 58% से घटकर 2026 में 55% हो गई है। कपड़ों और जूतों (Clothing and Footwear) में महंगाई दर जनवरी 2026 में 2.98% रही। ऐसे में, 7% के प्राइस हाइक का कपड़ों की मांग पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना अहम होगा। हो सकता है कि कंज्यूमर्स बढ़ती कीमतों के कारण ज़रूरी चीज़ों को प्राथमिकता दें।

प्राइस हाइक के बीच कंपनियों का प्रदर्शन

SIHMA के कई मेंबर ब्रांड्स पब्लिकली ट्रेडेड (Publicly Traded) हैं। Rupa & Company का टीटीएम पी/ई (TTM P/E) लगभग 16.03 है, लेकिन इसका 5 साल का रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) 5.06% रहा है, जो इंडस्ट्री एवरेज 9.37% से काफी कम है और मार्केट शेयर (Market Share) भी घटा है। Dollar Industries का टीटीएम पी/ई करीब 13.27 है और इसके पी/ई रेशियो में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। Lux Industries का टीटीएम पी/ई करीब 23.9 है, लेकिन पिछले 3 सालों में प्रॉफिट ग्रोथ (Profit Growth) -21.35% रही और ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Operating Cash Flow) नेगेटिव (Negative) रहा है। भारत में कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर (Consumer Discretionary Sector) का औसत पी/ई रेश्यो लगभग 24.0x है। Dixcy Textiles, जो अब मर्जर के बाद Modenik Lifestyle का हिस्सा है, ने पिछले साल नेगेटिव एबिटडा (EBITDA) रिपोर्ट किया था। इन कंपनियों को प्राइस हाइक के बीच अपने फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (Financial Performance) को बनाए रखना होगा।

आगे के जोखिम: मार्जिन पर दबाव और मांग की अनिश्चितता

हालांकि भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल मार्केट (Textile and Apparel Market) के 2025-26 तक $190 से $248.7 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन जोखिम अभी भी बने हुए हैं। कच्चे माल की लगातार बढ़ी कीमतें, खासकर क्रूड ऑयल से जुड़ी कीमतें, मार्जिन (Margin) पर दबाव डाल सकती हैं। ऐतिहासिक तौर पर, ऐसी लागत बढ़त ने भारतीय कॉटन गुड्स (Cotton Goods) को कम कॉम्पिटिटिव (Competitive) बनाया है, जिससे टेक्सटाइल फर्मों के स्टॉक में गिरावट आई है। घरेलू इनरवियर मार्केट (Innerwear Market) के बिखरे होने से बड़ी कंपनियों की प्राइसिंग फ्लेक्सिबिलिटी (Pricing Flexibility) भी सीमित है। इसके अलावा, अगर महंगाई की चिंताएं बढ़ीं या नौकरी की सुरक्षा को लेकर फिक्र बढ़ी, तो कंज्यूमर डिमांड (Consumer Demand) अनुमान से ज़्यादा गिर सकती है। यह ब्रांडेड कपड़ों जैसे गैर-ज़रूरी आइटम्स (Discretionary Items) की सेल्स वॉल्यूम (Sales Volume) के लिए बड़ा खतरा है। ट्रेड बैरियर्स (Trade Barriers) के कारण एक्सपोर्ट (Export) में संभावित सुस्ती भी एक बड़ा जोखिम है।

इंडस्ट्री की ग्रोथ की संभावनाएं

भविष्य की बात करें तो, भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री में 2034 तक 11% से ज़्यादा सीएजीआर (CAGR) की उम्मीद है। एनालिस्ट्स (Analysts) 2026 तक इनपुट कॉस्ट (Input Cost) के स्थिर होने की उम्मीद कर रहे हैं। यूके (UK) जैसे देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (Free Trade Agreements) भी टैरिफ कॉम्पिटिटिवनेस (Tariff Competitiveness) बढ़ा सकते हैं। भारत 2026 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंज्यूमर मार्केट (Consumer Market) बनने का अनुमान है और मज़बूत जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) जारी रखेगा। ये कारक मज़बूत अंतर्निहित मांग क्षमता (Underlying Demand Potential) दिखाते हैं, लेकिन तत्काल चुनौती मौजूदा महंगाई और कंज्यूमर की खर्च करने की शक्ति (Consumer Spending Power) पर इसके प्रभाव से निपटना है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.