इस साल 2026 की झुलसा देने वाली गर्मी ने भारत में आइसक्रीम के कारोबार में जान फूँक दी है। इंडस्ट्री की बिक्री में 30% से 40% तक की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि पिछले दो साल बेमौसम बरसात के कारण आइसक्रीम की बिक्री पर बुरा असर पड़ा था। इस बार के शानदार नतीजों ने पूरे सेक्टर में नया जोश भर दिया है।
डिमांड में उछाल और नए फ्लेवर
कंपनियां बता रही हैं कि जब भी गर्मी अपने चरम पर होती है, बिक्री रॉकेट की तरह बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए, कंपनियां इस सीजन के लिए खास इनोवेशन पर जोर दे रही हैं। कच्चे आम के सॉर्बेट, ताज़े नारियल वाले डेज़र्ट्स और फलों के फ्लेवर वाले कूलिंग ऑप्शन्स खूब पसंद किए जा रहे हैं। युवा पीढ़ी हल्की और हाइड्रेटिंग चीज़ें चुन रही है। वहीं, छोटे शहरों और गांवों में स्टिक और कप वाली सस्ती आइसक्रीम की डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है। बड़े शहरों के ग्राहक प्रीमियम प्रोडक्ट्स, फैमिली पैक और फलों के फ्लेवर वाले बड़े पैक्स की ओर रुख कर रहे हैं, और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स इन बिक्री में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
कैपेसिटी की तंगी और सप्लाई चेन पर दबाव
लेकिन इस अचानक बढ़ी हुई डिमांड को पूरा करने में इंडस्ट्री को काफी मुश्किलें आ रही हैं। पिछले दो सालों में डिमांड को लेकर अनिश्चितता के चलते कई कंपनियों ने प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने में देरी कर दी थी। अब ज्यादातर फैक्ट्रियां अपनी 100% क्षमता पर चल रही हैं। इसके अलावा, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल इश्यूज और फ्यूल व कच्चे माल की सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें भी दिक्कतों को और बढ़ा रही हैं। एलपीजी (LPG), डीज़ल (Diesel) और दूसरे ज़रूरी इनपुट्स की कमी लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग की एफिशिएंसी पर असर डाल रही है।
स्टॉक खत्म और क्विक कॉमर्स का जलवा
इस ज़बरदस्त मांग के चलते हर जगह आइसक्रीम के स्टॉक (Stock) खत्म हो रहे हैं। रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स बता रहे हैं कि डिलीवरी के कुछ ही घंटों में इन्वेंटरी (Inventory) बिक जाती है, क्योंकि डिमांड लगातार अनुमानों से ज़्यादा है। गर्म दिनों में 'अभी खरीदो' (Buy-Now) वाला माइंडसेट साफ दिख रहा है। क्विक-कॉमर्स इस सेक्टर के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन साबित हो रहा है, खासकर शहरी इलाकों में, जो तेज़ी से होम डिलीवरी सुनिश्चित करता है। हालांकि, इससे मार्केट का दायरा तो बढ़ रहा है और सेल्स भी तेज़ी से हो रही है, लेकिन यह कोल्ड-चेन (Cold Chain) और लास्ट-माइल डिलीवरी सिस्टम पर भारी दबाव डाल रहा है।